Classification of Network नेटवर्क का वर्गीकरण

तो दोस्तों आज का मेरा पोस्ट है- Classification of Network नेटवर्क का वर्गीकरण  जो आप लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह तो आप जानते ही है, किसी मोबाइल, कम्प्यूटर में नेटवर्क न रहे तो कोई काम नही होने वाला है। तो वही नेटवर्क को यहा कई भागों विभाजित किया गया है। एक नेटवर्क को निम्न दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।

पियर -टू – पियर (Classification of Network)

एक पियर – टू – पियर नेटवर्क में सर्वर नही होता है। यहाँ बहुत – से वर्कस्टेशन सूचनाओं या डिवाइसों को साझा करने के उद्देश्य के लिए एक – दूसरे से जुड़े रहते हैं। सभी वर्कस्टेशनों को एकसमान माना जाता है। कोई भी एक कम्प्यूटर किसी भी समय क्लाइण्ट या सर्वर की भाँति कार्य कर सकता है।

इसमें डाटा का डिजिटल प्रारूप में आदान – प्रदान होता है। इस नेटवर्क में कम्प्यूटर्स आपस में फाइलें ट्रांसफर करने के लिए यूनिवर्सल सीरियल बस से जुड़े होते हैं।

क्लाइण्ट / सर्वर 

ऐसा नेटवर्क, जिसमें एक कम्प्यूटर सर्वर तथा शेष कम्प्यूटर क्लाइण्ट की तरह कार्य करे, क्लाइण्ट / सर्वर तथा शेष कम्प्यूटर क्लाइण्ट की तरह कार्य करें। क्लाइण्ट / सर्वर नेटवर्क कहलाता है। क्लाइण्ट कम्प्यूटर, सर्वर से किसी सर्विस के लिए रिक्वेस्ट करता है तथा सर्वर उस रिक्वेस्ट के लिए उचित रेस्पॉन्स देता है।

नेटवर्किंग युक्तियाँ (Classification of Network)

सिग्नल्स की वास्तविक शक्ति को बढ़ाने के लिए नेटवर्किंग युक्तियों का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त नेटवर्किंग युक्तियों का प्रयोग दो – या – दो अधिक कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए भी किया जाता है। कुछ प्रमुख नेटवर्किंग युक्तियाँ निम्न है।

Classification of Network
Classification of Network

 

रिपीटर 

ये ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते है जो निम्न स्तर के सिग्नल्स को प्राप्त करके, उन्हें उच्च स्तर का बनाकर वापस भेजते हैं। इस प्रकार सिग्नल्स लम्बी दूरियों को बिना बाधा के तय कर सकते हैं। रिपीटर्स कमजोर पड़ चुके सिग्नल्स एवं उनसे होने वाली समस्य़ाओं से बचाता है। रिपीटर्स का प्रयोग नेटवर्क में कम्प्यूटरों को एक – दूसरे से जोड़ने वाले केबल की लम्बाई बढ़ाने में किया जाता है। इनकी उपयोगिता सर्वाधिक उस समय होती है, जब कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए बहुत लम्बी केबल की आवश्यकता होती है।

हब (Classification of Network in Hindi)

हब का प्रयोग ऐसे स्थान पर किया जाता है, जहाँ नेटवर्क की सभी केबल मिलती हैं। ये एक प्रकार का रिपीटर होता है, जिसमें नेटवर्क चैनलों को जोड़ने के लिए पोट्रर्स लगे होते हैं। सामन्यतया एक हब में 4, 8, 16 अथवा 24  पोर्ट लगे होते है। हब में कम्प्यूटरों को जोड़ना अथवा हबों को आपस में जोड़ना या हटाना बहुत सरल होता हैं। एक बड़े हब में लगभग 24 कम्प्यूटरों को जोड़ा जा सकता है। इससे अधिक कम्प्यूटरों को जोड़ने के लिए एक अतिरिक्त हब का प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को डेजी चेनिंग कहते हैं। हब ओएस आई  मॉडल के फिजिकल लेयर पर कार्य करता है।

हब के मूल प्रकार 

हब के कुछ मूल प्रकार निम्न हैं। 

1. पैसिव हब (Passive hub ) 

इस हब के लिेए विद्युत स्त्रोत की आवश्यकता नही होती क्योंकि यह किसी सिग्नल को फिर से उत्पन्न नही करता । पैसिव हब में केबल की लम्बाई अधिक होती है इसलिए पैसिव हब का उपयोग लगभग पूरी तरह से समाप्त हो गया है। पैसिव हबों को कभी – कभी कन्सन्ट्रेटर भी कहा जाता है।

2. एक्टिव हब ( Active hub ) 

एक्टिव हब आवश्यकता होने पर सिग्नलों को फिर से उत्पन्न करते हैं इसलिए इनके लिए विद्युत कनेक्शन की भी आवश्यकता होती है। एक्टिव हब रिपीटर का भी कार्य करता है।

3. इंटेलिजेण्ट हब ( Intelligent hub ) 

इस हब का प्रयोग नेटवर्क मैनेजमेन्ट में किया जाता है। यह हब कॉलीजन डिटेक्शन में भाग लेता है। यह हब एक से अधिक टोपोलॉजी की सुविधा प्रदान करता है तथा आभासी लैन बनाने में भी भाग लेता है।

ब्रिज Hindi me Classification of Network

ये छोटे नेटवर्कों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं, जिससे ये आपस में जुड़कर एक बड़े नेटवर्क की भाँति कार्य कर सकें। ब्रिज एक बड़े या व्यस्त नेटवर्क को छोटे हिस्सों में वितरित करने का भी कार्य करता है। व्यस्त नेटवर्क को तब बाँटा है, जब नेटवर्क के एक हिस्से को अन्य हिस्सों से अलग रखा जाना हो।

ब्रिज के मूल प्रकार ( Basic Types of Bridge ) 

ब्रिज के कुछ मूल प्रकार निम्न हैं।

1. लोकल ब्रिज ( Local bridge ) 

यह लोकल एरिया नेटवर्क को आपस में सीधे जोड़ता है।
2. रिमोट ब्रिज ( Remote bridge ) 

इस ब्रिज का प्रयोग दो – या – दो से अधिक दूर स्थित LAN को जोड़ने के लिए किया जाता है। कम्पनी लैनों को इसलिए जोड़ती है, जिससे वे एक बड़े लैन की भाँति कार्य करें।

3. वायरलेस ब्रिज ( Wireless Bridge ) 

ये रिमोट ब्रिज की भाँति हो सकते है। जब दों लैनों के ब्रिज को सीधी लाइन द्वारा जोड़ना सम्भव न हो, तो उन्हें वायरलेस ब्रिज द्वारा जोड़ा जा सकता है। ऐसे ब्रिज को सैटेलाइट ब्रिज भी कहा जाता हैं।

राउटर What is Classification of Network

राउटर का प्रयोग नेटवर्क में डाटा को कहीं भी भेजने के लिए करते हैं, इस प्रक्रिया को राउटिंग कहते हैं। राउटर एक जंक्शन की भाँति कार्य करते हैं। बड़ें नेटवर्कों में एक से अधिक रूट होते है, जिनके द्वारा सूचनाएँ अपने गन्तव्य तक पहुँच सकती हैं। ऐसे में राउटर्स ये निश्चय करते है, कि किसी सूचना को किस रास्ते से उसके गन्तव्य तक पहुँचाना हैं।

स्विच 

स्विच वे हार्डवेयर होते हैं जो विभिन्न कम्प्यूटरों को एक LAN में जोड़ते हैं। स्विच को हब के स्थान पर उपयोग किया जाता है। हब तथा स्विच के मध्य एक महत्वपूर्ण अन्तर यह है कि हब स्वयं तक आने वाले डाटा को अपने प्रत्येक पोर्ट पर भेजता है, जबकि स्विच स्वयं तक आने वाले डाटा को केवल उसके गन्तव्य तक भेजता है।

स्विच के मूल प्रकार ( Basic Types of Switch ) 

स्विच के कुछ मूल प्रकार निम्न हैं

1.अनमैनेज्ड स्विच ( Unmanaged switch ) 

इस प्रकार के स्विच साधारण होते है, जिनमें कॉन्फिगरेशन करने का कोई वकल्प नही होता। ये प्लग एण्ड प्ले प्रकार के उपकरण होते है। इस प्रकार के स्विच का प्रयोग समान्यतया घरों, ऑफिसों में किया जाता है।

2. मैनेज्ड स्विड ( Managed Switch ) 

मैनेज्ड स्विच का प्रयोग कार्य को नियन्त्रित करने या सुधारने के लिए किया जाता है। ऐसे स्विचों के काँन्फिगरेशन में कई परिवर्तन किए जा सकते हैं। मैनेज्ड स्विच भी दो प्रकार के होते हैं- स्मार्ट स्विच और एण्टरप्राइज मैनेज्ड स्विच ।

राउटिंग स्विच 

ऐसे स्विच, जिनमें राउटर और ब्रिज दोनों की क्षमताएँ होती है, उन्हें राउटिंग स्विच कहा जाता है। राउटिंग स्विच नेटवर्क के किसी कम्प्यूटर तक भेजी जाने वाली सूचनाओं को पहचान कर, उन्हें रास्ता दर्शाते हैं। राउटिंग स्विच, सूचनाओं को सबसे सही रास्ता खोजकर उनके गन्तव्य तक पहुँचाता है।

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ब्राउटर 

ब्राउटर शब्द ब्रिज और राउटर से मिलकर बना है। यह एक ऐसा उपकरण होता है जो कभी राउटर की भाँति और कभी ब्रिज की भाँति व्यवहार करता है। ये दो प्रकार के होते हैं – सिंगल प्रोटोकॉल तथा मल्टी प्रोटोकॉल

गेटवे 

यह एक ऐसी युक्ति है, जिसका प्रोयग दो विभिन्न नेटवर्क प्रोटोकॉल्स को जोड़ने के लिए किया जाता है। इन्हे प्रोटोकॉल परिवर्तक भी कहते हैं। फायरवॉल की भाँति कार्य करते हैं। गेटवे का कार्य राउटर या स्विच की तुलना में अधिक जटिल है।

Classification of Network 

आज का यह पोस्ट कैसा लगा कमेन्ट में जरुर बताइयेगा

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