आज के इस पोस्ट में Class 10 Computer विषय कवर किया गया है। कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के ‘Computare’ शब्द से हुई है, जिसका अर्थ – गणना करना हैं। कम्प्यूटर एक बड़े पैमाने पर गणना करने वाला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो डाटा ग्रहण करता है तथा सॉफ्टवेयर या प्रोग्राम के अनुसार किसी परिणाम के लिए डाटा को प्रोसस, संग्रहीत अथवा प्रदर्शित करता हैं।
कम्प्यूटर का परिचय (Class -10 Computer)
कम्प्यूटर शब्दावली में प्रयोग होने वाली कुछ टर्म निम्न प्रकार हैं
1. डाटा ( Data ) – यह तथ्यों तथा सूचनाओं का अव्यस्थित समूह होता है, जैसे – नम्बर, टैक्स्ट आदि।
2. प्रोसेसिंग (Processing )- यह सूचना में परिवर्तित करने के लिए डाटा पर किए गए कार्यों का क्रम हैं।
3. सूचना ( Information )- जब डाटा को उपयोगी बनाने के लिए इसे व्यवस्थित, संगठित तथा संचरित किया जाता है, तब प्राप्त डाटा सूचना कहलाती है।
4. निर्देश ( Insruction ) – यह यूजर द्वारा कम्प्यूटर लैंग्वेज में कम्प्यूटर को दिए गए कमाण्ड्स हैं।
5. प्रोग्राम ( Program ) – यह निर्देश का समूह होता है, जो कार्य करने के क्रम में कम्प्यूटर को दिए जाते हैं।
कम्प्यूटर की विशेषताएँ
Class -10 Computer
कम्प्यूटर की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन निम्नलिखित है
1.गति ( speed )- कम्प्यूटर का सबसे बड़ा गुण, गणना करने की तीव्र गति है। वर्तमान समय में, कम्प्यूटर नैनो सेकण्ड में तथा पीको सेकण्ड गणनाएँ कर सकता है।
2. त्रुटि रहित कार्य ( Error free work ) – कम्प्यूटर कठिन – से – कठिन प्रश्न का बिना किसी त्रुटि के परिणाम प्रदर्शित करता है। गणना के दौरान यदि कोई त्रुटि मिलती है, तो वह त्रुटि प्रोग्राम या डाटा में मानवीय गलतियों के कारण होती है।
3. सक्षमता – ( Diligence) – एक मशीन होने के कारण कम्प्यूटर पर बाहरी वातावरण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता । यह किसी भी कार्य को बिना रूके लाखो – करोड़ों बार करने में सक्षम है।
4. स्वचालित ( Automatic ) – कम्प्यूटर एक स्वचालित मशीन हैं, जिसमें गणना के दौरान मानवीय हस्तक्षेप की सम्भावना ना के बराबर होती है।
5. स्टोरेज क्षमता ( Storage capacity ) – कम्प्यूटर अपनी मैमोरी में डाटा तथा सूचनाओं का विशाल स्टोरेज संचित कर सकता है। इसमें आँकड़ो एवं प्रोग्रामों के स्टोरेज की क्षमता हार्ड डिस्क की क्षमता पर निर्भर करती है।
6. बहुउद्ददेशीय ( Versatile ) – कम्प्यूटर की सहायता से विभिन्न प्रकार के कार्य सम्पन्न किए जा सकते हैं। आधुनिक कम्प्यूटरों में, अलग – अलग प्रकार के कार्य एक साथ करने की क्षमता होती है।
कम्प्यूटर की सीमाएँ
कम्प्यूटर की विशेषताएँ होने के साथ – साथ कुछ सीमाएँ भी हैं, जो निम्न प्रकार हैं।
1. बुद्धिमता का अभाव – ( Lack of intelligence ) –
कम्प्यूटर में बुद्धिमता का अभाव होता है, जिसमें स्वयं सोचने – समझने की क्षमता नहीं होती । कम्प्यूटर केवल दिए गए निर्देशों के आधार पर ही कारता हैं।
2. महँगा ( Expensive ) – कम्प्यूटर के सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर काफी महँगे होते हैं।
3. विद्युत पर निर्भर – ( Depends on electricity) – कम्प्यूटर एक यान्त्रिक मशीन है, जिसके कारण कम्प्यूटर को क्रियाशील करने के लिए विद्युत का होना अनिवार्य है।
4. वायरस से प्रभाव – ( Effects from virus ) – कोई भी वायरस, कम्प्यूटर की कार्यक्षमता को प्रभावित करके उसमें संग्रहीत सूचनाओं तथा निर्देशों को नष्ट कर सकता है। अतः कम्प्यूटर को एण्टीवायरस सॉफ्टवेयर के द्वारा वायरस से बचाकर रखना चाहिए।
कम्प्यूटर का इतिहास –
आधुनिक कम्प्यूटरों को अस्तित्व में आए अभी कुछ ही वर्ष हुए हैं, लेकिन उनके विकास का इतिहास बहुत पुराना है। कम्प्यूटर के इतिहास का संक्षेप में वर्णन इस प्रकार
1. अबेकस ( Abacus ) – यह सबसे पहला एवं सरल यन्त्र है। इसे 16वी शताब्दी में चीन में बनाया गया था। इसका प्रयोग जोड़ने, घटाने व वर्गमूल ज्ञात करने के लिए किया जाता था।
2. पास्कलाइन ( Pascaline ) – यह प्रथम मैकेनिकल एडिंग मशीन है यह मशीन ओडोमीटर एवं घड़ी के सिद्धान्त पर कार्य करती है। इसका आविष्कार ब्लेज पास्कल ने सन् 1642 ( फ्रांस ) में किया था।
3. जेकॉर्डस लूम ( Jacquards loom ) – यह एक ऐसी बुनाई मशीन थी, जिसमें बुनाई के डिजाइन डालने के लिए छिद्र किए हुए कार्डो का उपयोग किया जाता था । इसका आविष्कार ‘जोसेफ – मेरी जैकार्ड’ ने सन् 1801 ( फ्रांस) में किया था।
4. डिफरेन्स इंजन ( Difference engine ) – इस मशीन की सहायता से विभिन्न बीजगणितीय फलनों का मान दशमलव के 20 स्थानों तक शुद्धतापूर्वक ज्ञात किया जा सकता था। इसका आविष्कार ‘चार्ल्स बैबेज’ ने सन् 1822 ( इंग्लैण्ड) में किया था ।
5. एनालिटिकल इंजन ( Analytical engine ) – यह ए मैकेनिकल मशीन है। इसका प्रयोग सभी गणितीय क्रियाओं को करने में किया जाता था। इसका आविष्कार भी ‘चार्ल्स बैबेज ’ द्वारा सन् 1837 ( इंग्लैण्ड ) में किया गया था। यह पहला समान्य उद्देश्य कम्प्यूटर था ।
6. टैबुलेटिंग मशीन – ( Tabulating machine )- इस मशीन का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1890 की जनगणना हेतु किया गया था। इस मशीन का आविष्कार ‘ डॉ0 हर्मन होलेरिथ’ ने सन् 1880 ( अमेरिका ) में किया था।
7. मार्क – 1 ( Mark-1) यह विश्व का प्रथम पूर्ण स्वचालित विद्युत यांत्रिक गणना यन्त्र था । इसका अविष्कार ‘हावर्ड आइकन’ ने सन् 1937 ( अमेरिका ) में किया था ।
8. एनिएक ( ENIAC ) यह बीस एक्युमुलेटर्स का एक संयोजन है। इसमें 18000 वैक्यूम ट्यब्स लगी थी। इसका प्रयोग इंजीनियर्स रिसर्च एसोसिएशन और IBM में किया गया था। इसका अविष्कार ‘जे पी एकर्ट और जॉन मौचली’ ने सन् ( 1946) ( अमेरिका) में किया था । एनिएक का पूर्ण नाम इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इण्टीग्रेटर एण्ड कम्प्यूटर है।
9. एडसैक ( EDSAC) – यह पहला प्रोग्राम संग्रहीत डिजिटल कम्प्यूटर था, जिसका आविष्कार ‘मौरिस विल्कस’ द्वारा सन् 1949 ( अमेरिका) में किया गया था। एडसैक का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक डिले स्टोरेज ऑटोमेटिक कैल्कुलेटर है।
10. यूनिवैक – यह सामान्य उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाने वाला प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर है। इसका आविष्कार ‘जे प्रेस्पर एकर्ट और जॉन डब्ल्यू मौचली’ ने सन् 1951 ( अमेरिका) में किया था। यूनिवैक का पूर्ण नाम यूनिवर्सल ऑटोमेटिक कम्प्यूटर है।

कम्प्यूटर के आकार के आधार पर
आकार के आधार पर कम्प्यूटर चार प्रकार के होते हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् हैं
1.माइक्रो कम्प्यूटर ( Micro computer) –
ये कम्प्यूटर आकार में इतने छोटे होते थे कि इन्हें डेस्क पर सरलतापूर्वक रखा जा सकता था। इन्हें कम्प्यूटर ऑन ए चिप कहा जाता है। आधुनिक युग में माइक्रो कम्प्यूटर फोन के आकार, पुस्तक के आकार तथा घड़ी के आकार में भी उपलब्ध हैं। इन कम्प्यूटरों का उपयोग मुख्यतया व्यवसाय तथा चिकित्सा के क्षेत्र में किया जाता है, जैसे – IMAC, IBM, PS/2, APPLE MAC इत्यादि। माइक्रो कम्प्यूटर निम्न प्रकार के होते हैं
( i ) डेस्कटॉप कम्प्यूटर – ( Desktop Computer ) –
यह एक छोटे माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित कम्प्यूटर है। इसे पर्सनल कम्प्यूटर भी कहा जाता है तथा यह सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला रूप है। इस तथ्य के बावजूद कि PCs को छोटा करके आज लैपटॉप और पामटॉप का आकार दे दिया है, फिर भी अधिकांश घरों और व्यापारिक स्थानों पर आपको डेस्कटॉप ही मिलेंगे, क्योकि ये सस्ते, टिकाऊ और ज्यादा चलने वाले होते हैं।
(ii) लैपटॉप ( Laptop)
विगत कुछ वर्षो में हुए तकनीकी विकास ने माइक्रों कम्प्यूटरों का आकार इतना सूक्ष्म कर दिया है कि उन्हें सरतापूर्वक इधर – उधर ले जाया जा सकता है, ऐसे पोर्टेबल कम्प्यूटरों को लैपटॉप कहा जाता है। लैपटॉप को कभी – कभी नोटबुक भी कहा जाता है।
यह भी पढ़ें रेडॉक्स विभव किसे कहते हैं? Free Top 50 Question
(iii) पामटॉप ( Palmtop)
यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो हाथ की हथेली पर रखकर आसानी से चलाया जा सकता है। यह लैपटॉप से भी हल्का और छोटा होता है। यह हैण्डहेल्ड ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करता हैं।
(iv) टैबलेट कम्प्यूटर ( Tablet Computer )
यह एक वायरलेस टच स्क्रीन पर्सनल कम्प्यूटर है, जो लौपटॉप से छोटा लेकिन स्मार्टफोन से बड़ा होता है। टैबलेट डेस्कटॉप कम्प्यूटर की तरह कई कार्य कर सकता है, जैसे – इण्टरनेट ब्राउज करना , सोशल नेवर्किग से कनेक्ट करना आदि।
(v) वर्कस्टेशन कम्प्यूटर ( Workstation computer)
यह कम्प्यूटर व्यक्तिगत कार्य के लिए प्रयोग होता है इसका आकार पर्सनल कम्प्यूटर के समान होता है, परन्तु यह पर्सनल कम्प्यूटर की तुलना में तेज और अधिक सक्षम होता है। इनका मुख्यातः प्रयोग वैज्ञानिक अनुसन्धानों में वैज्ञानिक कार्य करने के लिए किया जाता है।
(vi) एम्बेडेड कम्प्यूटर (Embedded Computer )
यह कम्प्यूटर एक विशिष्ट प्रक्रिया के लिए तैयार एक माइक्रोकण्ट्रोलर या माइक्रोप्रोसेसर आधारित प्रणाली है। आजकल एम्बेडेड कम्प्यूटर विभिन्न अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है। एम्बेडेड कम्प्यूटर बड़े सिस्टम का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह अपने प्रोसेसर पर निर्भर करता है। सेलफोन, कैमरे , ऑटोमेटिव सिस्टम, डिजिटल घड़ी इत्यादि एम्बेडेड कम्प्यूटर के कुछ सामान्य उदाहरण हैं।
2. मिनी कम्पयूटर – ( Mini Computer )
मध्यम आकार के इन कम्प्यूटरों की कार्यक्षमता तथा कीमत दोनों ही माइक्रो कम्प्यूटर की तुलना में अधिक होती हैं। इस प्रकार के कम्प्यूटरों पर एक या एक से अधिक व्यक्ति एक समय में एक से अधिक कार्य कर सकते हैं इनका उपयोग प्रायः छोटी या मध्यम स्तर की कम्पनियाँ करती हैं मिनी कम्प्यूटर की गति 10 से 30 MIPS ( Million Instructions Peu Second ) होती हैं, जैसे – HP 9000, RISC 6000, BULL HB- DPX2 और AS 400 आदि।
3. मेनफ्रेम कम्प्यूटर – ( Mainframe Computer)
ये कम्प्यूटर आकार, कार्यक्षमता और कीमत में मिनी तथा माइक्रो कम्प्यूटर से अधिक बड़े होते हैं। अधिकतर कम्पनियों में मेनफ्रेम कम्प्यूटरों का उपयोग भुगतानों का व्यौरा रखने, कर्मचारियों का भुगतान करने, उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई वस्तुओं का ब्यौरा रखने इत्यादि कार्यों में किया जाता है , जैसे – CRAY-1 , CDS – CYBER, IBM 4381, ICL 39, UNIVAC- 1110 आदि।
4. सुपर कम्प्यूटर – ( Super Computer)
ये कम्प्यूटर सर्वाधिक गति, संग्रह क्षमता एवं उच्च विस्तार वाले होते हैं। इनका आकार एक समान्य कमरे के बराबर होता है। विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर ‘क्रे रिसर्छ कम्पनी ’ द्वारा वर्ष 1976 में विकसित क्रे – 1 ( Cray – 1) था। भारत द्वारा निर्मित प्रथम सुपर कम्प्यूटर ‘ परम ( PARAM )’ है। इसका विकास C-DAC ने किया था। भारत में देश का सबसे तेज और मल्टीपेटाफ्लोप्स सुपर कम्प्यूटर प्रत्युष हैं। सुपर कम्प्यूटर का मुख्य उपयोग मौसम की भविष्यवाणी करने, एनिमेशन तथा चलचित्र का निर्माण करने, अन्तरिक्ष यात्रा के लिए अन्तरिक्ष यात्रियो को अन्तरिक्ष में भेजने, बड़े वैज्ञानिक और शोध प्रयोगशालाओं में शोध व खोज करने इत्यादि कार्यों में किया जाता हैं, । जैसे – PARAM, PARAM-YUVA-II, CRAY-1, CRAY-2, NEC-500, Pratyush आदि।
आज का यह पोस्ट कैसा लगा कमेन्ट करके जरुर बताइयेगा