pdfmandi-logo

www.pdfmandi.com

www.pdfmandi.com

up polytechnic entrance exam date 2021, up polytechnic admit card 2021


डीयर स्टूडेन्ट्स अगर आप ये 800 क्वेश्चन पाँच बार केवल मन से पढ लेते हैं तो निश्चित रुप 8 से 10 क्वेश्चन परीक्षा मे फँस जायेंगे तो नीचे से पढ़ना प्रारम्भ कीजिये।


1- प्रकाश वर्ष द्वारा दूरी का मापन किया जाता है।
2- गति और वेग समान SI इकाई से संबंधित हैं।
3- राकेटलान्च करना न्यूटन के गति के तीसरे नियम जिसे क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम भी कहते हैं, का उदाहरण है।
4- समय के साथ विस्थापन में परिवर्तन की दर को वेग जाता हैं।
5- गति का द्वितीय समीकरण स्थिति-समय के बीच संबंध प्रदान करता हैं।
6- किसी वस्तु का जड़त्व मापने की इकाई द्रव्यमान हैं।
7- मंदन ऋणात्मक त्वरण हैं।
8- एक सदिश राशि में परिमाण और दिशा दोनों हैं, जबकि अदिश राशि में केवल परिमाण होता है और दिशा नहीं होती।
इसलिए विस्थापन एक सदिश राशि हैं।
9- दूरी वह भौतिक राशि है, जो कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकता।
10- वेग-समय ग्राफ पर रेखा का ढलान त्वंरण कहलाता हैं।
11- गति का प्रथम नियम अर्थात न्युटन का गति विषयक प्रथम नियम गति के जड़त्व एवं विराम के परिभाषित करता हैं।
12- 72 किमी./घंटा की चाल को मीटर/सेकंड में दर्शान के लिए उसे 20 लिखेंगे।
(72 किमी./घंटा =मीटर/सेकंड) 13- यदि कोई वस्तु 4से. में 24 मी. तथा फिर 2 से. में 15 मी. की यात्रा करती है, तो वस्तु की औसत चाल 6.5 मी./से. होगी।
औसत चाल =(कुलदूरी)/(कुलसमय) 14- एक वस्तु 3 सेकंड में 25 मीटर और फिर 2सेकंड में 15 मीटर की यात्रा करता है, तो वस्तु की औसत चाल 8.0 मी./से.-1 होगी।
15- यदि एक बंदूक से गोली चलाई जाती है और बंदूक पीछे की ओर आती है, तो बंदूक की गतिज ऊर्जा गोली से कम होगी।
16- एक वृत्ताकार पथ में स्थिर गति वाले पिंड की गति को समान वृत्तीय गति कहा जाता है।
17- परमाणु त्रिज्या को ‘नैनोमीटर’ में मापा जाला है।
18- यदि एक वस्तु 3 सेकंड में 23 मी. और फिर 2 सेकंड में 15 मी. की यात्रा करता है, तो वस्तु की औसत चाल 7.6 ms-1होगी।
19- v = u + गति-समय संबंध का समीकरण है।
इसे गति का प्रथम समीकरण भी कहते हैं।
जहां v = अंतिम वेग, u= आरंभिक वेग, a= अपरिवर्तनशील त्वरण तथा t= समय, अर्थात वस्तु द्वारा आरंभ की स्थिति से अंतिम स्थित तक पहुंचने में लिया गया समय है।
20- एक निश्चित दिशा में बढ़ रही वस्तु की गति को वैज्ञानिक शब्दावली में वेग के रुप में जाना जाता हैं।
21- गति के दूसरे समीकरण S = ut + 1/2 at2 समीकरण का संबंध स्थिति-समय का है।
22- ऋणात्मक त्वरण (negative acceleration) में वस्तु का वेग घटता है।
23- किसी वस्तु से 500 किग्रा. द्रव्यमान की वस्तु पर 350 N का बल लगाने पर, इसमें उत्पन्नत्वरणa = F/m = 350/500 = 0.7ms-2होगा।
24- 25 किग्रा. के द्रव्यमान वाली वस्तु पर 8 मी./से2 का त्वरण आरोपित करने वाला बल 25x 8 (F=m a सूत्र से) अर्थात 200 न्यूटन होगा।
25- 20 मीटर की ऊंचाई (h) से पत्थर जमीन पर फेंका गया पत्थर v = √2ghवेग अर्थात v =√(2x10x20 ) =√400 =20 मी./से. के वेग से जमीन से टकराएगा।
26- द्रव्यमान/आयतन या M/v को घनत्व कहते हैं।
[D=M/V] 27- यदि हम पेड़ की शाखा को तेजी से हिलाएं, तो कुछ पत्तियां पेड़ से अलग हो जाती हैं।
यह जड़त्व के कारण होता हैं।
28- यदि वस्तु का वेग बढ़ जाता है, तो त्वरण धनात्मक होता है।
29- गति का दूसरा समीकरण स्थिति और समय के बीच संबंध दर्शाता हैं।
30- किसी वस्तु पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को भार कहा जाता है, इसे w से इंगित करते हैं।
31- यदि धरती की सतह पर किसी वस्तु का भार 60N हैं, तो चंद्रमा की सतह पर इसका भार 10N होगा।
32- यदि संवेग (p) और वेग (v) दिया हुआ हो, तो द्रव्यमान(m) ज्ञात करने के लिए प्रयुत्त्क सूत्रp/v होगा।
[∴p=m×v,∴m=p/v] 33- गुरुत्व द्वारा किया गया कार्य इस पथ पर निर्भर नहीं रहता जीस पर वस्तु गतिमान हैं।
34- समय के साथ किसी वस्तु का वेग दिखाने वाले ग्राफ को ‘वेग-समय ग्राफ’कहाजाताहैं।
35- गुरुत्वाकर्षणद्वारा किया गया कार्य वस्तु की आरंभिक व अंतिम अवस्थाओं की ऊर्ध्वाधर ऊंचाइयों के अंतर पर निर्भर करता हैं।
36- हेनरीकैवेंडीश ने गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक मान ‘G’ की खोज की।
37- यदि किई वस्तु समान समय अंतराल में असमान दूरी तय करती है, तो इसे असमान गति में कहा जाता हैं।
38- संवेग =द्रव्यमानx वेग किसी वस्तु के द्रव्यमान व वेग के गुणनफल के संवेग(Momentum) कहते हैं, यह सदिश राशि हैं।
P= mv 39- एक सतह पर एक वस्तु द्वारा लगाया गया प्रणोद (थ्रस्ट) वस्तु के भार के बराबर होता हैं 40- यदि एक कार विराम अवस्था से चलना शुरू करती है और एक साधी सडक पर 8 सेकंड के लिए 3 मी./से.-2 की दर से त्वरण करती है, तो स दौरान कार द्वारा तय की गई दूरी 96 मीटर होगी।
41- यदि एक कार की चाल 5 सेकंड में 36 किमी/घटा-1 से 54 किमी./घंटा-1 हो जाती है, त्वरण 1मीटर/सेकंड-2 होगा।
42- चाल और वेग का मात्रक मीटर/सेकंड हैं।
त्वरण का मात्रक मीटर/सेकंड2, बल का मात्रक किग्रा. मी./सेकंड2 (न्यूटन), संवेग का मात्र् किग्रा. मीटर/सेकंड हैं।
दूरी एवं विस्थापन दोनों ही लंबाई के मात्रक मीटर में मापे जाते हैं।
43- 2 मीटर/सेकंड को गति से बढ रहो गेंद द्रव्यमान से अपने दोगुनी एक स्थिर गेंद से सीधे टकराती हैं।
यदि पुनर्स्थापन का गुणांक 0.5 है, तो टकराने के बाद उनका वेग 0,1 होगा।
44- किसी Vगति से चलने वाले mद्रव्यमान का एक कण किसी दुसरेmद्रव्यमान वाले स्थिर कण से टकराव के बाद पहले कण का वेग शून्य होगा।
45- गति का पहला नियम वेग और समय के बीच संबंध प्रदान करता हैं।
46- विस्थापन ज्ञात करने के लिए हमें प्रारंभिक स्थिति तक एक सीधी रेखा बनानी होगी।
47- एक वस्तु का भार 98N है, तो पृथ्वी पर इसका द्रव्यमान लगभग 10 किग्रा. होगा।
48- त्वरण का प्रतिरोध करने की पिंड की प्रवृत्ति को जड़त्व कहा जाता है।
49- गैलीलियोगैलिली ने तर्क दिया था कि सभी ग्रह सूर्य की कक्षा में हैं, न कि पृथ्वी की कक्षा में।
50- यदि एक लड़का 3 किग्रा. वजन वाली साइकिल को समतल सड़क पर 10 मीटर की दूरी तक ले जाता है, तो उसके द्वारा गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध किए गए कार्य की मात्रा शून्य जूल(0J) हैं।
51- यदि कोई पिंड, रूपांतरित गति से, एक सीधी रेखा में गति करता हैं, तो इस गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।
52- यदि किसी तरंग की आवृति को दोगुना किया जाता है, तो इसकी तरंगदैर्ध्य मूल की आधी होगी।
53- लेंस का सूत्र 1/v-1/u=1/fहैं।
54- किसी वस्तु का संवेग वस्तु के द्रव्यमान और वेग दोनों पर निर्भर करता हैं।
55- आपेक्षिक घनत्व की कोई इकाई नहीं होती हैं।
56- कूलंब की SI इकाई विद्युत आवेश हैं।
57- मुक्त रूप से गिरने के दौरान कोई पिंड भारहीनता की स्थिति में होता हैं।
58- Nm2/Kg2गुरुत्वीयस्थिरांकG की एक इकाई हैं।
59- 1 न्युटन= 1 Kg ms-2 होता हैं।
60- जब पिंड को विषुवत रेखा से उत्तर और दक्षिण ध्रुवों पर ले जाया जाता है, तो उसका भार बढ़ जाता है।
61- सापेक्ष घनत्व पदार्थ का घनत्व/पानी का घनत्व के बनत्व के बराबर होता है।
62- जड़त्व वस्तु की वह प्रवृत्ति है जो उसकी गति या विरामावस्था की स्थिति का विरोध करती है।
63- द्रव्यमान को किसी वस्तु में मौजुद पदार्थ की मात्रा के रुप में परिभाषित किया जाता है।
64- 1 कूलॉमIS = 1 एम्पियर होता है।
65- एक ध्वनि तरंग की गति 340ms-1है।
यदि इसका तरंग दैर्ध्य 2 सेमी. है तो तरंग की आवृत्ति 17000 हर्ट्ज होगी।
66- एक कार सड़क के किनारे से गिरकर 0.5 सेकंड में जमीन पर आ पहुंचती है।
अगर g (गुरुत्वाकर्षण) =10 मीं/ सेकंड-2 है, तो जमीन मे टकराते समय कार की गति 5 मी/सेकंड-1 होगी।
67- मंदता की अंतरराष्ट्रीय (SI) इकाई मीटर/सेंकंड-2 हैं।
68- 6 किग्रा. ग्रा. का 6.005 किग्रा. लिखा जा सकता हैं।
69- यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान 20 किग्रा. है तो, पृथ्वी पर इसका वजन 200 न्यूटन (N) होगा।
70- 1 नैनोमीटर 1/10’ मीटर के बराबर होता हैं।
71- न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, क्रिया के बराबर किंतु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती हैं।
72- एक भीड़-भाड़ वाली सड़क पर एक बस की गति, असमान गति का एक उदाहरण है।
73- ऐसा बिंदु जहां पर वस्तु का संपुर्ण भार कार्य करता है, उसे ‘गुरुत्वाकर्षण का केंद्र’ कहा जाता है।
74- किसी वस्तु का चंद्रमा पर भार पृथ्वी पर के भार का 1/6 गुना हो जाता है।
75- चंद्रमा की सतह से लाए गए चट्टान के भार में वृद्घि होगी।
76- न्यूटन के गति के नियमों का प्रकाशन 1687 ई. में किया गया।
77- तात्कालिक वेग और औसत वेग तब बराबर होते हैं, जब वस्तु शून्य त्वरण (Zero acceleration ) अर्थात एक समान गति (Uniform motion) में होती है।
78- किसी चालक में एक निश्चित दिशा में इलेक्ट्रॉनों की औसत गति, अनुगमन वेग कहलाती है।
79- क्लोरीन, आर्सेनिक, बोरोन तथा सिलिकॉन में से क्लोरीन एक अधातु तत्व (non-metalic element) हैं. जबकी अन्य सभी अर्द्ध धातु हैं।
80- किसी लेंस की क्षमता, लेंस की फोकस दूरी (मीटर में) के व्युत्क्रम के बराबर होती है।
81- किसी भीड़ भरी गली पर किसी कार की गति, असमान गति (non-uniform. motion) का उदाहरण है।
82- गति के द्वितीय नियम के अनुसार किसी वस्तु की गति में परिवर्तन की दर, बल की दिशा में वस्तु पर लगे बल के आनिपातिक होती हैं।
83- चाल की अंतरराष्ट्रीय इकाई (S.I unit) m/s (मी./से.) हैं।
84- तापमान थर्मामीटर से मापा जाता है।
85- घनत्व की इकाई ग्राम/घन सेमी. है।
86- 100°C तापमान का मान 373 K होता हैं।
87- दाब की एस.आई. इकाई पास्कल हैं।
88- समुद्र की गहराई सामान्यतया ‘फैदोमीटर’ से मापी जाती हैं।
नाटिकल मील ‘समुद्री’ नापने की इकाई है।
89- एक समान रैखिक गति में वेग अपरिवर्तित होता है, त्वरण शून्य होता हैं।
90- असमान रैखिक गति में वेग एक-समान नहीं रहता, त्वरण अशून्य होता है।
यह भी दो प्रकार का होता है।
91- किसी घड़ि के लोलक की लंबाई बढ़ाए जाने पर आवर्तकाल बढ़ता हैं।
92- S.I. प्रणाली में कुल 7 मूल मात्रकों तथा दो व्यूत्पन्नमात्रकों रखा गया हैं।
93- मीटर, किलोग्राम, समय, सेकंड, केल्विन, एम्पियर, कैण्डिला मूल मात्रक हैं।
94- भारत में S.I. प्रणाली 1 अप्रैल, 1957 के लागू हुई।
95- त्वरण का मात्रकन्यूटन/किग्रा. होता है।
बल का मात्रकन्यूटनतथा ऊष्मा, कार्य अथवा ऊर्जा का मात्रकजूल हैं।
96- जड़त्व आघूर्णा का S.I. मात्रक किग्रा. मी.2 होता है।
97- वे भौतिक राशियां जिनमें परिमाण और दिशा दोनों होते हैं, सदिश राशियां कहलाती हैं, जैसे-वेग (Velocity ), बल (Force), त्वरण, विस्थापर आदि।
98- वे भौतिक राशियां जिनमें परिमाण होता है, दिशा नहीं होती, ‘अदिश राशियां’ (scalar Quantities) कहलाती हैं, जैसे-द्रव्यमान, तापमान, समय आदि।
99- किसी सदिश राशि का परीमाण (Magnitude) कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकता है।
100- किसी विशेष दिशा में गतिशील वस्तु की स्थिति परिवर्तन कों उसका विस्थापन कहते हैं।
101- शक्ति और ऊर्जा दोनों अदिश राशियां हैं।
102- लंबनिकसेकंड दूरी की इकाई है।
103- वाहन की गति मापने के लिए स्पीडोमीटर का प्रयोग किया जाता है।
पहाड़ो पर कम होता है।
104- दो वस्तओं के बीच कोणीय दूरी षष्ठक (sextant) से मापी जाती है 105- बार वायुमंडलीय दाब की इकाई है।
106- ताप की एस.आई. इकाई केल्विन हैं।
107- कांक्रीट रोड की अपेक्षा बर्फ पर चलना कठिनहोता है, क्योंकि बर्फ और पैरों के मध्य घर्षण से कम होता है।
108- हीरे का एक कैरेट 200 मि. ग्राम के बराबर होता है।
109- एक साधारण स्केल की सबसे छोटी माप एक मिलीमीटर होती हैं।
110- कोण की इकाई (मात्रक) ‘रेडियन’ होता है।
‘रेडियन’ इकाई को कोण के मापन में उपयोग करते हैं।
111- सूर्य की परिक्रमा में पृथ्वा का औसत वेग लगभग 30 किमी. प्रति सेकंड है।
112- पिको एक एस. आई. उपसर्ग है, इकाईयों के आगे लगकर जिसका अर्थ 10-12होता है।
उपसर्ग पिको (pico) 10-12 के बराबर होता है।
113- कोणीय वेग का विमीय सूत्र M0L0T-1है।
114- M.K.S. प्रणाली में त्वरण का मात्रकM/S2 है।
115- ज्योति तिव्रता (Luminous Intensity) का मात्रककैण्डेला (Can- dela) है।
116-‘ल्यूमेन’ ज्योति फ्लक्स का मात्रक है।
117- दो असमान द्रव्यमान समान गतिज ऊर्जा रखते हैं, तो भारी द्रव्यमान में अधिक संवेग होता है।
118- किसी वस्तु का संवेग (P) उसके द्रव्यमान (m) और वेग (v) के गुणनफलके बराबर होता है(P=mv) 119- गति के सूत्र s = ut + 1/2 at2 , में का मतलब वस्तु द्वारा t समय में तय की गई दूरी है।
120- तोप फायरिंग करने के बाद पीछे धक्का न्यूटर के गति के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) के अनुसार मारती है।
121- मैनोमीटरका उपयोग दाब मापने के लिए किया जाता है।
122- नैनोमीटर का प्रयोग अति अल्प दूरी मापने के लिए किया जाती है।
123- फ्रिक्वेंसी को मापने की इकाई साइकिल प्रति सेकंड अथवा हर्ट्ज है।
124- एक फैदम (Fathom) का मान 6 फीट है।
125- गाइगरमुलर काउंटर का उपयोग विकिरण मापन हेतु किया जाता है।
126- समय के सूक्ष्म अंतर को सटीक रूप से एटोमिक क्लॉक मापती है।
127- दुरी की एक इकाई नॉटिकलमाइल का प्रयोग नेविगेशन में किया जाता है।
128- क्रोनीमीटर से समय मापा जाता है।
129- किसी पिंड के विरामावस्था में या एकसमान गति करने पर, इसमें जड़त्व निहित होता है।
130- पराध्वनिक गति के मापन के लिए प्रयुक्त इकाई मैक है।
131- कार्य और ऊर्जा की SI इकाइयांसमान हैं।
132- एक लुढ़कता हुआ पत्थर, चलती हुई गोली, उठाया हुआ हथौड़ा एवं बहने वाली हवा में से केवल उठाया हुआ हथौड़ा में स्थितिज ऊर्जा होगी।
133- किसी mद्रव्यमान की v वेग से गतिमान वस्तु की गतिजउर्जा का सूत्र द्वारा ज्ञात की जा सकती है।
134- वस्तु की गति दोगुनी होने पर इसकिगतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
135- गतिज ऊर्जा को mv2 द्वारा व्यक्त किया जाता है।
136- जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ पर गति करती है, तो घुर्णन करती हुई वस्तु पर केंद्र की ओर लगने वाला बल अभिकेंद्रीय बल कहलाता है।
137- 1 किलोवाट घंटा =3.6 × 10‘जूल होता है।
138- वायु की प्रकृति के अनुसार प्लाज्मा पदार्थ एक विशेष रंग के साथ चमकते हैं।
139- बल एक ऐसा कारक है, जो किसी निकाय को गतिमान अवस्था में लाता है या लागै का प्रयास करता है या रोकता है या रोकने का प्रयास करता है।
140- बल × विस्थापन कार्य के बराबर होता है।
141- वांत्रिक ऊर्जा में दो प्रकार की ऊर्जा होती है।
142- कार्य करने की दर को शक्ति (power) कहते हैं।
143- वजन और बल की SI इकाई न्यूटन है।
144- गतिज ऊर्जा सदैव धनात्मक होती है।
145- पहाड़ से लुढ़कती हुई वस्तु में गतिजऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा दोनों होगी।
146- यदि कोई बल (F) किसी वस्तु परविस्थापन (S) की दिशा में लग रहा है, तो कार्य (W) का समीकरण F× S होग।
147- ‘g’ का मान पृथ्वी के केंद्र की ओर जाने पर कम होता है।
g का मान पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर भी कमहोता है।
148- ‘m’द्रव्यमान की कोई वस्तु जो ‘a’त्वरण से गतिशील है, उस पर प्रयुक्त बल m × a होगा।
149- बल/त्वरण=द्रव्यमान 150- चाय एक बागानी फसल है।
151- एक चली हुआ गोली, एक घूमता पहिया, तेजी से आता हुआ पत्थर, उठा हुआ हथौड़ा में से चली हुई गोली अधिक कार्य कर सकता है।
152- द्रव्यमान संख्या का चिन्ह M है? 153- द्रव्यमान और त्वरण का गुणनफल बल कहलाता है।
154- संयोजीऊतकमध्यजनस्तर (मेसोडर्म) निकलते हैं।
155- गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग यांत्रिक ऊर्जा होगा।
156- किसी निकाय को एक समान वृत्तीय गति से चलाने में लगने वाले आवश्यक नियत बल को अभिकेंद्रीय बल कहाजाता है।
157- एक घर में एक माह में 300 इकाई ऊर्जा की खपत हुई, जुल में यह ऊर्जा 1.080×109जूल होगी।
158- 1 किलोवॉट=1000 जूल-से.-1 159- यदि 30 किलोग्राम दव्यमान की एक वस्तु को 10ms-1 की एक समान वेग से स्थानांतरित किया जा रहा है, तो वस्तु की गतिशील ऊर्जा 1500 जूल होगी,।
K.E.= 1/2mv2 160- बल का मान नगण्य होने पर कोई वस्तु नियत गति से चलती है।
161- यदि एक वस्तु दोनों सिरों से पकड़कर खींची जाती है, तो उस पर लागू बल को खिंचाव कहा जाता है।
162- किसी वस्तु द्वारा कार्य करने की क्षमता या किसी वस्तु में निहित ऊर्जा कार्य करने वाली वस्तु की स्थिति औरअवस्था पर निर्भर करती है।
163- दो पिंडों के बीच बल सदैव समान और विपरीत दिशा में प्रयुक्त होते हैं।
164- जब दो समान बल किसी पिंड पर एक-दूसरे के विरुद्ध दिशा में प्रयुक्त होते हैं, तो पिंड पर प्रयुक्त होने वाला कुल हल शून्य होगा।
165- 1 जुल/सेकेंड= 1 वॉट होता है।
वाट शक्ति का मात्रक है।
166- ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
167- यदि 20 किग्रा. द्रव्यमान की एक वस्तु जमीन से 8 मी. की ऊंचाई पर है, तब वस्तु द्वारा प्राप्त स्थितिज ऊर्जा 1568 (J) होगी।
P.E.=mgh 168- किसी वस्तु पर लगने वाले सामर्थ्य को ‘ऊर्जा’ कहते हैं।
169- 10 किग्रा. की एक वस्तु 2 मी./से. की गति से आगे बढ़ रही है, तो वस्तु की गतिज ऊर्जा 20 जूल (J) होगी KE = 1/2 mv2 170- यदि कोई व्यक्ति 50Nके बल सहित 10mकी दूरी तक ट्रॉली को खींचता है, तो उसके द्वारा किया गया कार्य 500 जुल होगा।
171- 10v (वोल्ट) के विभवान्तर वाले दो बिंदुओं के बीच 5Q (कूलाम) के आवेश को प्रवाहित करने में 50 जूल होगा।
172- 100W (वॉट) का एक विधुतबल्ब प्रत्येक दिन 8 घंटे उपयोग करने पर 5 दिन में 4 यूनिट 100 * 173- कार्य हुआ है, ऐसा कहने के लिए वस्तु का विस्थापित होना आवश्यक है।
174- एक अधिक शक्तिशाली इंजन कम समय में अधिक कार्य कर सकता है।
जैसे- एक हवाई जहाज में कम समय में अधिक दूरी तय करती है, अतः हवाजहाज का से अधिक शक्तिशाली है।
. यह शक्ति का उदाहरण है।
175- पृथ्वी के आकर्षण बल के कारण किसी पिंड में उत्पन्न होने वाली वेग या त्वरण को गुरुत्वजनित त्वरण कहते हैं, जिसे ‘g’ द्वारा व्यक्ति किया जाता है।
इसका मान 9.8 मीटर/से.2 होता है।
176- किसी उंचाई पर एक वस्तु की स्थितिज ऊर्जा को गुरुत्वीयस्थितिज ऊर्जा कहतें हैं।
177- गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
178- औसत शक्ति =(कुलप्रयुक्तऊर्जा)/(कुलसमय) 179- बंदुक से निकली गोली, तीव्र गति से कार्यरत एक रेलवे इंजन तथा एक साधारण पेंडुलम की गति. गतिज ऊर्जा के उदाहरण हैं।
180- प्रत्येक वस्तु एक अन्य वस्तु को एक बल के साथ आकर्षित करती है, जो उनके मध्य दुरी के वर्ग के विपरीत आनुपातिक है।
181- द्रव्यमान और त्वरण के गुणनफल को बल कहा जाता है।
F =M. a 182- विस्थापन न होने पर किया गया कार्य शून्य होता है।
183- स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु की ऊंचाई के साथ बदलती है।
184- ब्रह्मांड में किन्हीं दो निकायों के बीच गुरुत्वाकर्षण बल उनके द्रव्यमानों के योग पर निर्भर नहीं करता है।
185- किसी वस्तु पर बाहरी धक्के या खिंचाव को बल कहते हैं।
186- किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा को ज्ञात करने का सूत्र Ek= 1/(2 ) mv2है।
187- यदि वेग को दोगुना कर दिया जाए, तो संवेग 2 गुना और गतिज ऊर्जा 4 गुना बढ़ जाएगी।
188- किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा को संयुक्त रूप से यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं।
189- बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होता है, यदि विस्थापन बल की दिशा में हो।
190- 10 किग्रा. द्रव्यमान की बाइसकिल 20 मी/से.के वेग से चलने पर गतिज ऊर्जा 1/2mv2 =1/2×10 ×202 = 2000 जूल से युक्त होगी।
191- किसी ऊंचाई पर रखे पत्थर तथा खिंच हुए तीर कमान में एक समानता यह है की इन दोनों में स्थितिज ऊर्जा संचित है।
192- यदि दो लगाए गए बलों का परिणामी (resultant) शून्य हो, तो इन बलों को संतुलित बल (Balanced forces). कहते है।
193- जिस बल से पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की तरफ खींचती है, उसे वस्तु का भार या वजन कहते है।
194- 5.5 kwh = 19.8 ×106जूल होता है।
195- शक्ति का एस.आई. मात्रकवॉट है।
196- मेज, कुर्सी तथा भूमि पर बैठे हुए व्यक्ति को अपेक्षा छत पर बैठे हुए व्यक्ति के पास अधिकतम स्थितिज ऊर्जा होगी।
197- ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत के अनुसार, ऊर्जा का सिर्फ परिवर्तन होता है।
अतः वस्तु की अधिकतम स्थिति पर स्थितीज ऊर्जा अधिकतम होगी और जैसे-जैसे वस्तु नीचे आएगी उसकी गतिज ऊर्जा में वृद्धि होगी, इसलिए मध्य स्थिति में गतिज व स्थितिज ऊर्जा दोनों बराबर होंगी।
198- 10 किग्रा. द्रव्यमान वाली एक वस्तु 4 मी./से.-1 वेग के साथ गतिमान है।
वस्तु में निहित गतिज ऊर्जा 80 जूल (J) होगी।
199- दो निकायों के बीच बल हमेशा बराबर और विपरीत होता है।
200- किसी पिंड पर कार्य तभी किया जाता है, जब यह एक यांत्रिक प्रभाव के माध्यम से ऊर्जा वृद्धि का अनुमव कराता है।
201- यदि 20 किलोग्राम द्रव्यमान की वस्तु 5 मीटर/ सेकंड की गति के साथ चलती है, तो उसकी गतिज ऊर्जा 250 जूल(J) होगी।
202- यदि एक आदमी 20 किग्रा. का भार भूमि से 5 मीटर की ऊंचाई तक उठाता है, तो उसके द्वारा किया गया कार्य 1000 जूल(J) है।
203- 14 किग्रा. द्रव्यमान की एक वस्तु को भूमि से एक निश्चित ऊंचाई पर रखा गया है।
यदि वस्तु की स्थितिज ऊर्जा 560 जूल है, तो भूमि के संबंध में वस्तु की ऊंचाई लगभग 4 मीटर होगी।
204- 1 किलोवॉट घंटा (1kwh) 3600000 जूल(J) के बराबर होता है।
205- वेग और समय का गुणनफल विस्थापन होता है।
206- पृथ्वी की सतह जहां पर हवा का घर्षण नगण्य होता है, वस्तुएं एक समान त्वरण से गिरती हैं।
207- दो वस्तुओं के बीच आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहा जाता है।
208- स्थितिज ऊर्जा = Mghहोता है।
जहां M= द्रव का द्रव्यमान, g = गुरुत्वीयत्वरण तथा h =निर्देश बिंदु से ऊंचाई है।
209- यदि कार्य का मान धनात्मक हो, तो जिस निकाय पर कार्य हो रहा है उसकी ऊर्जा मेम वृद्धि होगी।
210- जमीन के ऊपर एक बिंदु पर किसी वस्तु की गुरुत्वीयस्थितिज ऊर्जा को इसे गुरुत्वाकंर्षण के विपरीत जमीन से उस बिंदु पर उठाने में किए गए कायों के रूप में परिभाषित किया जाता है।
211- गैस के कणों की गतिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
212- गतिज ऊर्जा सदैव धनात्मक होती है।
213- गतिज ऊर्जा सदैव धनात्मक होती है।
214- कार्य संवेग पर निर्भर नहीं करता है।
215- जब दो समान बल किसी निकाय पर और विपरीत दिशा में कार्य कर रहे हों, तो निकाय पर कार्य करने वाला बल शून्य होगा।
216- यदि 10 किग्रा. भार की बाइसाइकिल 20 मी./से. कि गति से चलती है, तो बाइसाइकिल की गतिजऊर्या 2000 जूल होगी।
217- बल और विस्थापन के उत्पाद को कार्य कहा जाता है।
218- एक 10 किग्रा. की वस्तु 5 मी./से. की गति से गतिमान है, तो वस्तु की गतिज ऊर्जा 125जूल होगी।
219- शक्ति को कार्य करने की दर अथवा ऊर्जा स्थानांतरण की दर के रूप में व्यवस्थापित किया जाता है।
220- 13 किग्रा. की एक वस्तु जब भमि से 5 मी. की ऊंचाई पर हो, तब इसमें निहित ऊर्जा 637 जूल होगी, जहां g =9.8 ms-2है।
221- किसी वस्तु पर किया गया कार्य वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।
222- दो वस्तुओं के दूरी को परिवर्तित किए बिना उनके द्रव्यमान को आधा कर दिया जाए, तो गुरुत्वाकर्षण बल F/4 हो जाएगा।
223- जब कार एक घुमावदार सड़क पर मुड़ती है, तो उसमें बैठे यात्रा, स्वयं पर केंद्र की विपरीत दिशा में एक महसुस करते हैं, इस बल का कारण जड़त्व है।
224- किसी वस्तु पर बल लगाने पर यदि वह गतिशील नहीं होती है तो इसे कहा जा सकता है कि कोई कार्य नहीं हुआ है।
225- यदि वस्तु का विस्थापन शून्य हो, तो बल द्वारा वस्तु पर किया गया कार्य शून्य होगा।
226- किसी सिस्टम में जब दो अप्रत्यास्थ पिंडों के बीच टक्कर होती है, तब उसमें गतिज ऊर्जा परिवर्तित हो जाती है परंतु संवेग संरक्षित रहता है।
227- जब किसी पिण्ड पर केवल गुरुत्व बल कार्य करे, तो यह कहा जाएगा कि पिण्ड मुक्त रूप सेगिर रहा है।
228- गुरुत्वाकर्षण बल प्रत्येक वस्तुओं के बीच मौजूद होता है, परंतु इसे तब तक महसूस नहीं किया जा सकता जब तक कि वस्तुओं का द्रव्यमान बहुत अधिक न हो।
229- प्रयुक्त बल कि दिशा और बस्तु के गतिशील होने की दिशा एक दूसरे में लंबवतहों तो कोई कार्य नहीं हुआ।
230- पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति गुरुत्व बल के कारण होती है।
231- न्यूटन के गति का दूसरा नियम बल के प्रभावों को समझने में सहायक है।
232- घर्षण द्वारा किया गया कार्य ‘ऋणात्मक’ होता है।
233- 10 न्यूटन का एक क्षैतिज बल 5 किग्रा. की एक वस्तु को बल की दिशा में 2 मीटर की दूरी तक विस्थापित कर देता है, तो बल द्वारा किया गया कार्य 20 जूल होगा।
234- जब किसी प्रतिरक्षा बल ‘F’ को विपरीत दिशा में लगाया जाता है, तो दो दिशाओं के बीच 180° का कोण होगा।
235- एक 800 किग्रा. की कार 90 किमी. /घंटा की चाल से चल रही है।
ब्रेक लगने के 5 सेकंड बाद यह कार रुकती है।
ब्रेक द्वारा लगाया गया बल 4000 न्यूटन होगा।
236- 2as = v2–u2स्थिति – वेग को दर्शाती है 237- यदि पृथ्वी पर सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का मान Ge हो और चंद्रमा पर सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक का मान Gm तब GeGm होगा।
238- kWh ऊर्जा की वाणिज्यिक इकाई है।
जूल/सेकंड है।
239- यदि हम किसी दिए गए बल के क्षेत्र को बढ़ाते हैं, तो इससे दाब (प्रति इकाई क्षेत्र ) कम हो जाता हैं।
240- शक्ति (Power) की SI इकाई जूल/सेकंड है 241- किसी mद्रव्यमान के पिंड को पृथ्वी की त्रिज्या(R) की दोगुनी ऊंचाई (2R) पर एक गोलाकार कक्षा में प्रक्षेपित करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा 5/6mgRहोती है।
242- एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर स्टेशन पर बहने वाला पानी बड़ी मात्रा में गतिज ऊर्जा से युक्त होता है तथा यह ऊर्जा ही टरबाइन घुमाने में प्रयुक्त होती है।
243- कोई वस्तु किसी द्रव में तभी तैर सकती है, जब द्रव द्वारा वस्तु पर लगा उत्प्लावक बल वस्तु के भार के बराबर या इससे अधिक होगा।
244-आयनीकरण ऊर्जा की इकाई किलो जूल/मोल (Kjmil-1) है।
245- संवेग की S.I. इकाई किग्रा. मी./से. (Kg ms-1) है।
246- एक समतल पर गतिमान कण पर लगे लम्बवत बल के कारण वेग का परिमाण स्थिर रहने से इसकी गतिज ऊर्जा स्थिर रहती है।
247- dyne.cm-2l, Pa, Nm-2तथा N में से केवल N (न्यूटन) बल की इकाई है।
अन्य सभी दाब की इकाइयां हैं।
248- यदि वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाए तो, मुक्त रूप से गिरते हुए पिंड की गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर होता है।
249- भोजन के पाचन से रासायनिक ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तन होता है।
250- एक संपीडित (compressed) स्प्रिंग में स्थितिज ऊर्जा होती है।
251- ‘a’ त्वरण से गतिमान mद्रव्यमान की वस्तु पर लगने वाले बल का मान m×a होता है।
252- किसी mद्रव्मान की वस्तु के वेग में वृद्धि करने हेतु किए गए कार्य की गणना वस्तु की गतिज ऊर्जा में वृद्धि ज्ञान करके की जा सकती है।
253- यदि कोई व्यक्ति t समय में w कार्य करता है, तो उसकी शक्ति w/t होगी।
254- पदार्थ के कणों के बीच आकर्षण बल अधिकतम पदार्थ की ठोस अवस्था में होता है।
255- किसी कुली द्वारा 20 किग्रा. का द्रव्यमान 2 मीटर ऊपर उठाकर अपने सर पर रखने में किया गया कार्य =m ×g × h = 20 × 10× 2 = 400J 256- ऊर्जा का उपयोग करते हुए पाइरूविक का विघटन माइटोकॉन्ड्रिया में होता है।
257- एक गति करती हुई कार पर विपरीत दिशा सें आती हुई हवा द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होगा।
258- गति और वेग, विस्थापन और दूरी तथा कार्य और ऊर्जा समान S.I इकाई वाले जोड़े हैं, जबकि बल तथा दाब की S.I इकाइयां अलग- अलग होती हैं।
259- द्रव्य और ऊर्जा तुल्य हैं, एक को दूसरे के रूप में बदला जा सकता है।
इस परिवर्तन मेंE=mc2 का संबंध लागू होता है।
260- स्प्रिंग को अपनी सामान्य लंबाई पर वापस लौटने के लिए लगने वाले बल को ‘प्रत्यास्थप्रत्यानयन बल’ (Elastic RestoringForce) कहते हैं।
261- प्रत्यास्थता (Elasticity) किसी वस्तु के पदार्थ का वह गुण है, जिसके कारण वस्तु किसी विरूपक बल (Deforming Force) के द्वारा उत्पन्न आकार अथवा आकृति के परिवर्तन का विरोध करती है।
262- घनत्व वह भौतिक राशि है, जिस पर मात्रा में वृद्धि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
263- कार्य करने की दर को शक्ति या सामर्थ्य कहते हैं।
शक्ति (कार्य)/समय 264- जड़त्व का नियम न्यूटर के गति के प्रथम नियम को ही व्यक्त करता है, जिसके अनुसार, कोई गतिमान या स्थिर वस्तु अपनी गति या स्थिर अवस्था को तब तक बनाए रखती है, जब तक कि उस पर कोई बाह्म बल न लगाया जाए।
265- न्यूटर का गति संबंधी तृतीय नियम, क्रिया-प्रतिक्रिया नियम भी कहलाता है, जिसके अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
266- “किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर, वस्तु पर लगे बल के अनुक्रमानुपाती होती है।
” यह कथन न्यूटर के गति संबंधी द्वितीय नियम को व्यक्त करता है।
267- चंद्रमा पर ‘g’ का मान, पृथ्वी पर के ‘g’ के मान का 1/6 होता है।
268- साइकिल सवार किसी मोड़ में घूमता है, तो वह ‘अभिकेंद्रीय बल’ (Centripetal Force) से अपने भार को संतुलित कर सकेगा।
269- अभिकेंद्रीय बल की दिशा केंद्र की ओर होती है।
270- वृत्ताकार मार्ग पर गतिशील कण को वृत्त के केंद्र से मिलाने वाली रेखा एक सेकंड में जितने कोण से घूम जाती है, उसे उस कण का ‘कोणीय वेग’ (angular velocity) कहते हैं।
271- जब किसी वस्तु में विशेष अवस्था (Position) के कारण कार्य करने की क्षमता आ जाती है, तो ‘स्थितिज ऊर्जा’ (PotentialEnergy) कहा जाता है।
272- न्यूटन ने अपनी पुस्तक ‘प्रिंसिपिया’ में गुरुत्वाकर्षण का नियम दिया है।
273- रेखीय संवेग संरक्षण निकलकर आता है, न्यूटन के द्वितीय तथा तृतीय नियम दोनों के योग से।
274- किसी वस्तु या पिंड में उसकी गति या वेग के कारण कार्य करने की क्षमता को ‘गतिज ऊर्जा’ कहते हैं।
जैसे बंदूक से दागी गई गोली में, तोप से छोड़े गए गोले में, चलते हुए वाहन में तथा घूमते हुए लट्टू में उत्पन्न ऊर्जा।
275- जब दो बल ‘क्रिया’ एवं ‘प्रतिक्रिया’ एक ही बिंदुओं पर क्रिया करते हैं, तो परिणामी बल शून्य होगा।
276- जब कोई पिंड हवाई जहाज से नीचे गिरता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है।
277- सड़कों या रेलवे ट्रैक के वक्रों पर ढलान दी जाती है, क्योंकि यह अभिकेंद्रीय बल प्रदान करता है।
278- एक कार और भरी हुई एक ट्रक रास्ते पर समान गति से चलते हैं।
ट्रक से तुलना की जाए तो कार कम गतिज ऊर्जा धारण करेगी।
279- एक व्यक्ति एक दीवार को धक्का देता है, पर विस्थापित करने में असफल रहता है, तो वह कोई भी कार्य नहीं करता है।
280- साइकिल, स्कूटर आदि में बॉल-बेरिंग का उपयोग किया जाता है, जिससे पहिए और धुरी के बीच घर्षण घट जाए।
181- एक खींचे गए रबड़ बैंड में स्थितिज ऊर्जा निहित है।
282- एक आनत समतल के सहारे लकड़ी के ब्लॉक को ऊपर खींचकर पहुंचाना आसान होता है, बजाए ऊर्ध्वाधर उठाकर।
इसका प्रमुख कारण है कि आनत तल के सहारे लकड़ी का द्रव्यमान कम हो जाता है।
283- जब कोई वस्तु (पिंड) एक वृत्त के अनुचर गति से चलती है, तो उस पर कोई भी कार्य नहीं हो रहा होता।
284- एक ‘पारसेक’ में कुल 3.26 ‘प्रकाशवर्ष’ होता है।
285- यदि mद्रव्यमान (Mass) का क पिंड, एक समान वेग v से R त्रिज्या (Radius) के एक वृत्ताकार पथ पर गतिमान है, तो अभिकेंद्री बल (Centripetak Force )mv/R2है।
286- (वेग(वेलोसिटी)मेंपरिवर्तन)/समय को गतिवर्धन (त्वरण) कहते हैं।
287- बंदूक का प्रतिक्षेप (धक्का) रैखिक संवेग का संरक्षण है।
288- प्रकाश-संश्लेषण से प्रकाश ऊर्जा, रसायन ऊर्जा में रूपांतरित होती है।
289- मान लें कि m1 एवं m2 द्रव्यमान (Mass) के दो पिंडों के बीच की दूरी r है।
उनके बीच गुरुत्वाकर्षण आकर्षण बल होगा- F=G (m_1 m_2)/r^2 290- यदि एक पिंड को जमीन से एक निश्चित ऊंचाई से गिराया जाए, तो जब यह जमीन से आधी ऊंचाई पर होगी तो इसमें गतिज और स्थैतिक ऊर्जा दोनों होगी।
291- ठोस में अंतराणुक आकर्षण बल सबसे अधिक होता है।
292- जब क्रेन लोहे के एक भारी बोझ को ऊपर उठाती है, तो इस अवस्था में यांत्रिक बल का प्रयोग होता है।
293- कोयला, यूरेनियम, पेट्रोलियम, सौर ऊर्जा में से सौर ऊर्जा अपरंपरागत स्त्रोत है।
294- प्रत्यास्थसंघट्टन (Elastic Collision) में केवल संवेग का संरक्षण होता है।
295- एक जूल, लगभग 0.24कैलोरी (Cal) के बराबर होता है।
296- घर्षण स्थैतिज ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में बदल कर कम किए जाते हैं।
297- भारत में ऊर्जा का प्राथमिक स्त्रोत कोयला है।
298- आंतरिक बल कभी भी संतुलित बल नहीं होते है।
299- जब कोई वस्तु मुक्त रूप से पृथ्वी की ओर गिरती है, तब इसकी कुल ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है।
300- भोजन की ऊर्जा को कैलोरीज में मापा जाता है।
301- सापेक्षिक घनत्व (Relative density) की कोई इकाई नहीं होती है।
302- रडार का उपयोग जहाजो ,वायुयानो आदि को ढूढ़ने एवं मार्ग निर्देश करने के लिए किया जाता है।
303- वायुमंडलीय दाब पर 1 किग्रा. ठोस को इसके गलनांकबिंदु पर तरल अवस्था में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मीय ऊर्जा की राशि है, द्रवण की गुप्त ऊष्मा।
304- 0°C तापमान पर परनी, तरल एवं ठोस दोनों स्थितियाँ में विद्यमान हो सकता है।
305- लोहे की कील का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होता है।
306- नमक और पानी मिश्रण को आमतौर पर आसवन की प्रक्रिया द्वारा अलग किया जाता है।
307- एक निश्चित तापमान पर वायु का दाब घनत्व के आनुपातिक होता है।
308- सही अर्थों में मुक्त पतन निर्वात में होता है।
309-जब पानी से भरे हुए एक बीकर में एक कॉर्क और कील को रखा जाता है, तो कॉर्क तैरता है, जबकि कील डुब जाती है।
इसके पीछे कारण लोहे की कील का घनत्व पानी के घनत्व से अधिक होना है।
| 310- वैज्ञानिक अल्बर्टआइंस्टीन ने यह दिखाया कि द्रव्य को ऊर्जा में और ऊर्जा को द्रव्य में स्थानांतरित किया जा सकता है।
311- किसी वस्तु का द्रव्यमान नियत रहता है और यह स्थान बदलने पर नहीं बदलता है।
312- पृथ्वी का द्रव्यमान लगभग 6 × 1024 किग्रा. है।
313- यदि दो वस्तुओं का द्रव्यमान दो गुना हो जाए, तो दोनों वस्तुओं के बीच बल एक-चौथाई होगा।
314- गुरुत्वाकर्षण बल जो वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणन का सीधा आनुपातिक है।
315- भाप एक सतह की घटना है।
316- ठोस, द्रव और गैस-द्रव में विसरित होते हैं।
गैसों की विसरण दर द्रव या ठोस की तुलना में अधिक होती है।
317- यदि कोई वस्तु जिसका द्रव्यमानm है, v वेग से गतिमान हो, तो इसका संवेग mv होगा।
318- द्रव्यमान पिंड के गुरुत्वीयत्वरण के मान को प्रभावित नहीं करता है।
, क्योंकि गुरुत्वीयत्वरणg के सूत्र g=GM/R^2 में पिंड का द्रव्यमानm नहीं है।
319- नदी से निकलकर समुद्र में प्रवेश करने ही जहाज कुछ ऊपर उठ जाता है, क्योंकि समुद्र के जल का घनत्व अधिक होता है।
320- वाशिंग मशीन की कार्य- प्रणाली ‘अपकेंद्रण के सिद्धांत पर आधारित है।
321- किसी द्रव को उसके क्वथनांक से पूर्व उसके वाष्प में बदलने की क्रिया को ‘वाष्पीकरण’ (Evaporation) कहते हैं।
322- द्रवों में पृष्ठ तनाव का कारण अणुओं के मध्य ससंजक बल है।
ससंजक बल वह आकर्षण बल है, जो एक ही प्रकार के अणुओं के बीच कार्य करता है।
323- पृष्ठ तनाव द्रव की वह प्रवृत्ति है, जिससे द्रव अपना क्षेत्रफल न्यूनतम करने का प्रयास करता है।
324- पानी से भरे गिलास के अंदर तैरते हुए बर्फ के टुकड़े के पिघल जाने पर जल का स्तर वही बना रहता है, क्योंकि बर्फ के टुकड़े द्वारा प्रतिस्थापित जल का आयतन बर्फ के द्रव रूप के आयतन के बराबर होता है।
325- उत्प्लावी बल किसी वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।
यह सिद्धांत आर्किमिडीज ने दिया था।
326- पिघलने पर सामान्यतया ठोस के आयतन में वृद्धि होती है, लेकिन बर्फ पिघलने पर सिकुड़ती है।
327- यदि ठोस में कोई अशुद्धि विद्यमान है, तो उसका गलनांक कम हो जाता है।
328- ‘पारा’ सीसे को नहीं भिगोता है, क्योंकि विकृति ससंजन बल आसंजन बल से अधिक होता है।
329- जल में किसी डिटर्जेंट (साबुन) को मिलाने से पृष्ठ तनाव कम हो जाता है।
330- संवहन (convection) की प्रक्रिया में ऊष्मा का संचरण अणुओं के वास्तवीक स्थानांतरण के द्वारा होता है।
331- पानी की विशिष्ट ऊष्मा सर्वाधिक होता है।
इसका मान एक कैलोरी ग्राम-1सेंटीग्रेड या 4181 जूल किग्रा.-1 सेटीग्रेड-1 होता है।
332- किसी पदार्थ के 1ग्राम का तापमान 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को उस पदार्थ की ‘विशिष्ट ऊष्मा’ कहते हैं।
333- संघनन वह क्रिया है, जिसमें वाष्प द्रव में परिवर्तित होती है।
334- ताप बढ़ाने पर प्रत्यास्थ्य मान घटते हैं, क्योंकि ताप बढ़ाने से पदार्थों की अवस्था में परिवर्तन हो जाता है।
335- फॉरेनहाइट पैमाने में शुद्ध जल का क्वथनांक 212° होता है।
336- अत्यधिक शीत ऋतु में पहाड़ों पर पानी की पाइप लाइनें फट जाती हैं, क्योंकि पाइप में पानी जमने पर फैल जाता है।
337- यदि किसी ठोस और द्रव के घनत्व समान हैं, तो ठोस तैरेगा।
338- पानी से भरी कॉर्कयुक्त्त बोतल को जब जमाया जाता है तब यह टुट जाती है, क्योंकि जमने पर पानी का आयतन बढ़ जाता है।
339- पानी पर तैरती वस्तु का आभासी भार शून्य होता है।
340- जल में तैरते हिमखंड का आयतन 1/9 होता है।
341- यदि किसी वस्तु को संपीडित करते हुए उसके पूर्व के आयतन का आधा किया जाए, तो इसका घनत्व दोगुना हो जाता है।
342- गैस लाइटर, गैसस्टोव, बुनसेनबर्नर में से बुनसेनबर्नर, बरनौली के सिद्धांत पर कार्य करता है।
343- एक पाइप (स्ट्रॉ) के माध्यम से शीतल पेय पीना संभव होने का कारण केशिका क्रिया है।
344- लकड़ी का एक टुकड़ा पानी में तैरता है।
यदि पानी को गर्म किया जाए, तो लकड़ी का टुकड़ा थोड़ा डुब जाएगा।
345- कड़ाके की ठंड पड़ने से झीलों की ऊपरी सतह जम जाती है, ‘लेकिन उसके अधोभाग पर जल द्रव अवस्था में बना रहता है।
346- द्रवों का नियत आयतन परंतु कोई नियत आकार नहीं होता है।
347- पृष्ठ तनाव द्रव की प्रकृति पर निर्भर करता है।
348- जल का हिमांक 32℉ है।
349- द्रव का मुक्त पृष्ठ एक शीट की तरह व्यवहार करता है और सबसे छोटे क्षेत्रफल में संकुचित होने के लिए प्रवृत रहता है।
ऐसा होने का कारण ससंजन बल (Cohesion Force) है।
350- वाष्पन और संघनन वर्षा कराने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
351- नदी की तुलना में समुद्र में तैरना आसान है, क्योंकि समुद्र के पानी का घनत्व नदी के पानी से अधिक होता है।
352- पानी न तो अम्लीय है और न ही क्षारीय, क्योंकि यह हाइड्रोजन आयनके समान संख्या में विघटित हो सकता है।
353- वस्तु के द्रव्यमान को उनके आयतन से भाग देने को घनत्व कहा जाता है।
354- किसी द्रव के पृष्ठ तनाव के कारण बल गोलाकार सतह पर स्पर्शी की दिशा में लंबवत रूप में सक्रिय होता है।
355- प्रतिबल का प्रभाव क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।
356- किसी पदार्थ को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में दाब बढ़ा कर परिवर्तित किया जा सकता है।
357- दाब = उत्क्षेप/क्षेत्रफल होता है।
358- समुद्र तल पर पर्यावरणीय दाब 10133.25hpaया 1Atmहोता है।
359- एटमॉस्फेरिकप्रेसर या वायुमंडलीय दाब 1013.25 mbar या 1.01×105Pa होता है।
360- एक पास्कल 1 न्यूटर/मीटर के बराबर होता है।
361- समुद्र तल पर वायूमंडलीय दबाव 1मिलीबार होता है।
362- पानी का वाष्पीकरण सभी तापमान पर होता है।
363- थ्रस्ट प्रति इकाई क्षेत्र को दाब कहा जाता है।
364- दाब की अंतरराष्ट्रीय (SI) इकाई न्युटन मीटर-2 (Nm-2) है, जिसे पास्कल (Pa)भी कहते हैं।
365- डाल्टन का आंशिक दाब का नियम CO+H2पर लागू होता है।
366- वह तापमान जिस पर कोई द्रव वायुमंडलीय दाव पर उबलना शुरू कर देता है।
क्वथनांक (boiling point) कहलाता है।
367- 273 K तापमान 0℃ के बराबर होता है।
368- ठोस के पिघलने (melting) के दौरान इसका तापमान परिवर्तित नहीं होता है।
369- बॉयल के नियम के अनुसार, स्थिर ताप पर गैस के निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाव के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
370- वायु का प्रवाह उच्च वायु दाब से निम्न वायु दाब की दिशा में होता है।
371- कोल्डस्टोरेज के निर्माण में मोटी ईंट की दीवार का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि ईंट ताप की कुचालक होती है।
372- भूमध्य रेखा पर रहने वाले व्यक्ति को एक वर्ष की अवधि में सर्वाधिक ऊष्मा की अनुभूति होगी।
373- सिइक्लोट्रॉन आवेशित कण त्वरक है, जो आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा से त्वरित कर सकता है।
374- ब्रह्मांड के प्रत्येक पिंड एक- दूसरे को आकर्षित करते हैं, वस्तुओं के बीच यह आकर्षण बल गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।
375- पृथ्वी के वायुमंडल से परे खाली जगह से सूरज की ऊष्मीय ऊर्जा की मात्रा को विकिरण के रूप में जाना जाता है।
376- एक इलेक्ट्रिक केतली में पानी चालन के कारण गर्म हो जाता है।
377- जल की विशिष्ट ऊष्मा एक कैलोरी /ग्राम सेंटीग्रेट है।
378- समुद्र तल पर वायुमंडलीय दाब 760mm Hg है।
379- ग्रीष्म ऋतु में धुल भरी आंधियां तापमान को बहुत अधिक बढ़ाती हैं।
380- जब नैदानिक थर्मामीटर को उबलते हुए जल में रखा जाता है, तो कभी-कभी यह फट जाता है, क्योंकि नैदानिक थर्मामीटर मानव शरीर के ताप का केवल, लघु परास पढ़ने के लिए होता है और बहुत उच्च ताप होने पर यह फट जाता है।
381- पॉलीथीन का गलनांक 105-135℃ तक होता है।
382- वायु का विशिष्ट ताप वायु के घनत्व के बढ़ने के साथ बढ़ने है।
383- साधारण मिट्टी के पात्रों में रखा गया पानी शीलत रहता है, क्योंकि छिद्रों से पानी निकलते हुए वाष्पित होता रहता है।
384- प्रति यूनिट क्षेत्रफल पर कार्यरत बल को दाब कहा जाता है।
385- हेमेटाइट लोहे का अयस्क है।
386- दाब में वृद्धि होने के साथ द्रव के क्वथनांक में वृद्धि हो जाती है।
387- 100 डिग्री सेल्सियस पर संतृप्त जलवाष्प का दाब पारा के 760 मिमी. दाब के बराबर होता है।
388- मरीचिका जो कि पूर्ण आंतरिक परावर्तन के फलस्वरूप उत्पन्न होता है एक प्रकाश का दृष्टि भ्रम है।
389- दिए गए एक तापमान पर, ध्वनि की गति एल्युमिनीयम में अधिकतम होती है।
390- कंपन ध्वनि की विशेषता नहीं है।
391- जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है, तो इसकी गति कम हो जाती है।
392- जेम्समैक्सवेल ने विद्युत चुंबकत्व और प्रकाश के संयोजन द्वारा यह प्रदर्शित किया कि प्रकाश एक विद्युत चुंबकीय तरंग है।
393- किसी गोलाकार दर्पण की फोकस दूरी इसकी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।
394- ध्वनि को एक ऐसे माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है, जिसमें अणु हों और जो कंपन्न करते हैं।
395- ठोस में ध्वनि की चाल सबसे अधिक होता है।
396- हीरा का निरपेक्ष अपवर्तनांक 2.42 होता है।
397- जब प्रकाश किसी चमकीली सतह पर आपतित होता है, नियमित परावर्तन की घटना घटित होती है।
398- प्रकाश सबसे अधिक गति से निर्वात में यात्रा करता है।
399- विस्फोट के कारण समुद्र के तल पर उत्पन्न अनुदैर्ध्य तरंगें हैं।
400- जब एक वस्तु को उत्तल लेंस की 2F_1स्थिति पर रखा जाता है, तो छवि का आकार पूर्ववत होता है।
401- लेंस का सूत्र है – यदि किसी लेंस जिसकी फोकस दूरी (f), बिंबदुरी (u), प्रतिबिंब दूरी (v) है, लेंस सूत्र निम्नलिखित होगा– 402- ध्वनि यांत्रिक ऊर्जा का एक रूप है, जो सुनने की अनुभूति पैदा करती है।
403- स्टील में ध्वनि की गति सबसे तेज होती है।
404- यदि किसी दर्पण की फोकस लंबाई + 15 है, तो यह उत्तल दर्पण होगा।
405- एक ध्वनि स्रोत 400 Hz आवृत्ति और 2.5 मीटर तरंगदैर्ध्य की तरंगें भेजता है।
ध्वन तरंगों की चाल 1000 मीटर/सेकंड होगी।
406- समतल दर्पण पर किसी वस्तु का प्रतिबिंब आभासी और पार्श्व उल्टा होता है।
407- वस्तुओं में कंपन होने पर ध्वनि उत्पन्न होती है।
408- अल्ट्रासोनिक (पराश्रव्य) ध्वनि तरंगों की आवृत्ति 20000 हर्ट्ज से भी अधिक होती है।
409- घनत्व माध्यम में प्रकाश किरणों के झुकाव के झुकाव को ‘अपवर्तन’ कहा जाता है।
410- 25℃ पर हाइड्रोजन गैस में गैस में ध्वनि की चाल 1284 मी./से. है, तथा हीलियमगैस में 965 मीटर/सेकंड है।
411- जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है, तो वह अक्ष (नार्मल) की ओर झुक जाता है।
412- किसी माध्यम के प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता को इसके प्रकाश घनत्व द्वारा भी व्यक्त किया जाता है।
अधिकतम प्रकाशित घनत्व का माध्यम हीरा है।
413- समुद्री जल में ध्वनि की गति 1531मी./से. (या 1500 मी./से.) होती है।
414- ध्वनि द्रव्य, ठोस और गैस तीनों में संचरण कर सकती है।
415- रियर- व्यू दर्पण में उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है।
416- कंपन कर रही वस्तु का समयांतराल 0.04 सेकंड है, तो तरंग की आवृत्ति 25 हर्ट्ज होगी।
417- दूरदृष्टि दोष से पीड़ीत व्यक्ति के नेत्र में किसी वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।
418- वायु में ध्वनि के वेग से अधिक की चाल से यात्रा करने वाली एक वस्तु को ‘पराध्वनिक’ कहा जाता है।
419- SONAER का पूर्ण रूप ‘साउंडनेविगेशन एंड रेंजिंग’ (Sound Navigation and Ranging)है।
420- जब एक मूल ध्वनि एक प्रतिबाधा द्वारा परावर्तित होकर हमारे कानों तक पहुंचती है, तो प्रकिध्वनी 0.IS के बाद सुनाई देती है।
421- आभासी तथा सीधे प्रतिबिंब के लिए दर्पण का आवर्धन धनात्मक होता है।
422- अल्ट्रासोनिकक्लीनिंग. इक्षित आकार कट एंव छेद बनाने एवं धातुओं में विकृति पता करने हेतु अल्ट्रासोनिकडिटेक्शन आदि पराश्रव्य तरंगों के औद्योगिक उपयोग हैं।
423- फोकल लंबाई (f= 50 मी.) के लेंस की क्षमता (Power)का मान 1/(f(मी. में))=100/50 अर्थात 2 डायोप्टर होगा।
424- ध्रुव, फोकस, वक्रता केंद्र तथा फोकस दूरी में सें केवल ध्रुव (Pole) दर्पण के वक्रता केंद्र पर स्थित होता है।
425- टंगस्टन धातु का उपयोग इलेक्ट्रिकबल्ब के फिलामेंट बनाने में किया जाता है।
426- एक लेंस की शक्ति इसकी फोकस दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
427- एक गोलाकार दर्पण जिसकी वक्रता त्रिज्याR है, उसकी फोकस दूरी R/2 होगी।
428- पॉलिश सतह पर प्रकाश की एक किरण सतह पर मिलने के बाद उसी माध्यम में लौटती है, उसे प्रत्यावर्तन कहा जाता है।
429- गुणवत्ता, ध्वनि की वह विशेषता है, जिससे एक समान प्रबलता और पिच की दो ध्वनियों के बीच अंतर बताया जा सकता है।
430- यदि कोई वस्तु अनंत पर है, तो उत्तल लेंस के कारण निर्मित प्रकिबिंब की स्थित फोकस बिंदु पर होगी।
431- एक लड़के ने एक चट्टान के पास ताली बजाई और 3 सेकंड के बाद उसे प्रतिध्वनि सुनाई दिया।
यदि ध्वनि की गति 346 मीटर सेकंड-1 है, तो वह लड़का चट्टान से 519 मीटर दूर है।
432- यदि अवतल दर्पण और फोकस(F) के बीच कोई वस्तु रखी गई है, तो निर्मित प्रतिबिंब आभासी होगा।
433- ध्वनि तरंगेअनुदैर्ध्य होता है।
और प्रकाश तरंगे अनुप्रस्थ होता हैं।
434- यदि पत्तियों की सरसराहट की तीव्रता 10-11Wm-2 है, तो उक्त सरसराहट के कारण तीव्रता का स्तर 10dB होगा।
435- ध्वनि तरंग का आयाम प्रबलता को निर्धारित करता है।
436- एक अवतल दर्पण में C पर समान आकार का वास्तविक,उल्टा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए उस वस्तु को C पर रखा जाना चाहिए।
437- एक वस्तु को 10 सेमी. फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस के अक्ष पर 15 सेमी. की दूरी पर रखा गया है, तो बनने वाली छवि वास्तविक और बड़ी होगी।
438- ध्वनि को एक ऐसे माध्यम से प्रेषित किया जा सकता है, जिसमें अणु हों और जो कंपन करते है।
439- कंपन इंगित करता है कि दो बिंदुओं के मध्य तेजी से आना-जाना किसी वस्तु की किस प्रकार की गति है।
440- अवतल लेंस का उपयोग निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) से पीड़ित लोगों द्वारा किया जाता है।
441- ध्वनि-संचरण के समय माध्यम में कणों के उच्च घनत्व का क्षेत्र ‘सपीडन ’ कहलाता है।
442- 25℃ पर हवा में ध्वनि की गति 346m/s होती है।
443- निकेल में ध्वनि की गति 6040m/s है और स्टील में 5960 m/s है।
444- एक दर्पण के वक्रता की फोकस लंबाई और त्रिज्या के बीच सम्बन्ध है।
R=2f or F=R/2 445- पल्स कुछ समय की तरंग है।
446- एक साधारण आवर्धरणग्लास छोटी फोकल लंबाई का उत्तल लेंस होती है।
447- एक वस्तु को एक अवतल दर्पण के सामने उसके फोकस बिंदु और वक्रता केंद्र के बीच स्थित एक बिंदु पर रखा गया है, तो उसकी छवि वास्तविक और उल्टी होगी।
448- विभिन्न माध्यमों में 25℃ पर ध्वनि के संदर्भ में एल्युमीनियम में ध्वनि की गति 6420 मी. /से. है, निकल में, ध्वनि की गति 6240 मी/.से. है, से एल्युमीनियम में ध्वनि की गति 6420 मी./से. है सत्य है।
449- लेंस की शक्ति का मात्रक‘डायोप्टर’ है।
450- यदि एक श्रंग और इसके क्रमागता गर्त के मध्य दूरी L है, तो तरंगदैर्ध्य 22 होगी ।
451- श्रवणीय रेंज से नीचे आवृत्तियों की ध्वनि तरंगों को ‘अपश्रष्य’ (इंफ्रासोनिक) तरंगे कहा जाता है।
452- जब कोई प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाती है, तो प्रकाश किरण अभीलंब की ओर झुक जाती है अर्थात यदि प्रकाश की किरण पानि से ग्लास तक जाती है, तो यह अभिलंब (Normal) की ओर झुक जाती है।
453- एक माध्यम जिसका अपवर्तकसुचकांक 1.5 है,में प्रकाश की गति 2.0×103 मीटर/सेकंड होगी।
454- प्रकाश के वेग के साथ तुलनीय वेग में गति करने वाले कणो पर न्युटन के नियम सार्थक नही है।
455- अलग-अलग प्रतिध्वनियों को सुनने के लिए ध्वनि के स्रोत से अवरोध की न्युनतम दूरी 17.2 मीटर होनी चाहिए।
456- तरंग लंबाई को आमतौर पर ग्रीकलेटरलैम्डा में दर्शाया जाता है।
457- यदि एक व्यक्ति ने चट्टान के पास ताली बजाई और उसे 4 सेकंड बाद गुंज सुनाई दी,तो व्यक्ति से चट्टान की दूरी 692 मी.है।
458- जिस वस्तु के माध्यम से ध्वनि प्रेषित की जाती है, उसे माध्यम कहा जाता है।
459- हवा में ध्वनि तरंगेअनुदैर्ध्य होती है।
460- ध्वनि की चाल भिन्न-भिन्न माध्यमों में भिन्न-भिन्न होती है।
461- चमगादड़, परावर्तितपराश्रव्य तरंगें प्राप्त कर रास्ते की रुकावटों का पता लगा सकते हैं।
462- एक सर्किटआरेख में प्रतीक श्याम प्रतिरोध (resistance) के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
463- अल्ट्रॉसोनोग्राफी में पराश्रव्य (Ultrasonic)तरंगों का उपयोग किया जाता है।
464- यदि समान वोल्टता पर दो बल्ब जलाए जाने पर एक अधिक चमकता है और दूसरा कम तो कम चमकने वाले बल्ब का प्रतिरोध उच्च होगा।
465- यदि किसी तरंग में दो क्रमीकशीर्पो के बीच की दूरी L है, तो उसकी तरंग दैर्ध्यL होगी।
466- नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को ‘पुतली’ द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
467- चूहे अल्ट्रासाउंड उत्पन्न करके गेम खेलते हैं।
468- प्रकाश जब सधन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है, तो इसकी चाल बढ़ जाती है।
469- तरंगदैर्ध्य का मात्रक ‘एंगस्ट्राम होता है।
470- तरंग की आवृत्ति अपने तरंगदैर्ध्य से प्रतिलोमीसमानुपातिक होती है।
471- ‘सितार’ यांत्रिक उर्जा को ध्वनि उर्जा में परिवर्तित करती है।
472- ऑप्टिक्स भौतिक विज्ञान की वह शाखा है जिसमें प्रकास की प्रकृति और गुणधर्मों का अध्ययन किया जाता है।
473- स्त्रियों और बच्चों की आवाज तीखी होती है इसका कारण उच्च आवृत्ति होता है।
474- पानी के अंदर ध्वनि को रिकॉर्ड करने वाला यंत्र हाइड्रोफोन है।
475- ध्वनि को दूर तक भेजने वाला यंत्र मेगाफोन है।
476- ध्वनि तरंगो को विद्युत तरंगो में परिवर्तित करने वाला यंत्र माइक्रोफोन है।
477- ध्वनि की तीव्रता मापने वाला यंत्र ऑडियोमीटर है।
478- तड़ित की चमक उसकी गर्जन सुनाई देने से पहले देखने में आती है, क्योंकि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से अधिक होती है।
479- किसी दर्पण में सें परावर्तन के पश्चात तरंग के आयाम में परिवर्तन होता है।
480- तरंग का आयाम बदल जाता है,तरंग की आवृति ,तरंगदैर्ध्य व वेग में कोई परिवर्तन नही होता है।
481- कंपन करता हुआ कोई पिण्ड अपनी माध्य स्थिति से अधिकतम जितना विस्थापित होता है,उसे आयाम कहते है।
482- एक कंपन पूरा करने मे लगे समय को आवर्तकाल कहा जाता है।
483- एक आवर्तकाल में तरंग द्वारा चली गयी दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते है,एकसेकण्ड में जितने कंपन होते है उसे आवृति कहते है।
484- अवतल दर्पण का उपयोग दाढ़ी बनाने ,गाड़ी के हेडलाइट एवं सर्चलाइट में ,सोलरकूकर में तथा आँख,कान तथा नाक के डाक्टर द्वारा प्रयोग में लाया जाता है।
485- प्रकाश का रंग तरंगदैर्ध्य (wave Length) द्वारा निश्चित किया जाता है।
486- सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य लाल रंग के प्रकाश की होती है।
487- सबसे कम तरंगदैर्ध्य बैंगनी रंग के प्रकाश की होती है।
488- अधिक तरंगदैर्ध्य के कारण लाल प्रकाश अधिक दूर तक दिखाई पड़ता है।
अत:सिग्नल लाल रंग के बनाए जाते है।
489- उत्तल लेंस में प्रतिबिम्ब की लंबाई वस्तु की अपेक्षा छोटी ,बराबर या बड़ी हो सकती है।
अवतल लेंस में प्रतिबिम्ब की लंबाई सदैव ही वस्तु की अपेक्षा कम होती है।
490- मोटर वाहनों में पश्चदृश्य दर्पण के रुप में उत्तल दर्पण उपयोग में लाया जाता है।
491- अवतल दर्पण के फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच रखी वस्तु का प्रतिबिम्बऊल्टा बनता है।
492-साथ ही इस दूरी में रखे वस्तुओका प्रतिबिम्ब समान आकार से लेकर बड़े आकार तक बनता है।
493-दंत चिकित्सको के द्वारा अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है।
494- टी.वी. सेट चलाने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले रिमोट कंट्रोल यूनिट में सूक्ष्म तरंग का प्रयोग किया जाता है।
495- किसी वस्तु के त्रिविमीयप्रतिबिम्ब के उत्पन्न करने व रिकार्ड करने की तकनीक को होलोग्राफी कहते है 496- यदि लेंस द्वारा देखने पर अक्षरो का आकार का आकार छोटा दिखाई देता है तो वह लेंस अवतल लेंस है।
497- इकोसाउण्डिंग एक तकनीक है,जिसका प्रयोग करके सागर की गहराई को मापा जाता है. 498- धूप के चश्मे के लिए क्रक्स कांच प्रयुक्त होता है।
499- सर्वाधिक तरंगदैर्ध्य दीर्घ रेडियो तरंगो का होता है।
500- ऐसी तरंगे जिनका ध्रुवीकरण नही हो सकता है अनुदैर्ध्यतरंगे (Longitudinal Waves) कहलाती है।
501- प्रकाश विद्युत चुम्बकीयतरंगे है।
विद्युत चुम्बकीयतरंगो के लिए माध्यम का होना आवश्यक नहीं।
502- ‘बिगबैंग सिद्धांत’ का मुख्य आधार डॉप्लर का प्रभाव है, जो सापेक्षिक गति की व्याख्या करता है।
503- दूरबीन (Telescope) से दूर की वस्तुएं देखी जाती हैं।
दूरबीन वह प्रकाशिक यंत्र है, जिसके द्वारा दूर स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब आंख पर बड़ा दर्शन कोण बनाता है, जिससे कि वह वस्तु आंख को बड़ी दिखाई पड़ती है।
504- दूरबीन के आविष्कारक ‘गैलीलियो’ हैं।
505- सर्वप्रथम रोमर ने प्रकाश की चाल का मापन किया।
506- पानी में डूबी हुई छड़ी अपवर्तन के कारण मुड़ी हुई प्रतीत होता है।
507- रेगिस्तान में यात्रियों को कुछ दूरी पर पानी होने का भ्रम होता है।
इसे रेगिस्तान की ‘मृग-तृष्णा’ कहते है।
508- तराशा हुआ हीरा अपने उच्च अपवर्तनांक के कारण पूर्ण आंतरिक परावर्तन से चमकता है।
509- व्यतिकरणप्रारूप (इंटरफ्रेंसपैटर्न) में ऊर्जा का पुनर्वितरण होता है, कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।
510- पनडुब्बी के अंदर से बाहर की वस्तुओं को देखने के लिए पेरिस्कोप का प्रयोग किया जाता है।
511- बुनकरों द्वारा विभिन्न प्रकार के रंगीन डिजाइन देखने के लिए कैलिडोस्कोप का उपयोग किया जाता है।
512- भारत के नरेंद्र सिंह कपानी को ऑप्टिकलफाइबरको खोजकर्ताओं में से एक के रूप में माना जाता है।
513- 20Hzसे कम की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें ‘अपश्रव्य तरंगें’ तथा 20,000Hz से अधिक आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें ‘पराश्रव्य तरंगें’ कहलाती हैं।
514- 20 हर्ट्ज से 20 किलो हर्ट्ज तक की आवृत्ति की तरंगें ‘श्रव्य तरंगें’ कहलाती हैं।
515- मनुष्य द्वारा सुनी जाने वाली ध्वनि 20-20000 हर्ट्ज होती है, जबकि कुत्ते तथा बिल्लियों द्वारा 30 किलो हर्ट्ज से ऊपर की ध्वनि सुनी जा सकती है।
516- जिस जगह वायु का दबाव अधिक होता है, वहां पानी का क्वथनांक अधिक होता है और जहां वायुदाब कम होगा, वहां पानी का क्वथनांक कम होता है।
517- प्रेशरकुकर में खाना कम समय में तैयार हो जाता है, क्योंकिजल का क्वथनांक बढ़ जाता है।
518- प्रकाश का वेग ताप पर निर्भर नहीं करता।
519- प्राथमिक रंगो को मिश्रित करने पर जो रंग प्राप्त होते है,उन्हें द्वितीयक अथवा अनुपूरक रंग कहा जाता है।
520- लेसर का तात्पर्य -लाइट एम्पलीफिकेशन बाई स्टीमुलेटेडएमिशन ऑफ रेडिएशन है।
521- एक्स किरण का उपयोग अंधेरे में फोटोग्राफबिंबो के रुप में किया जाता है।
522- बादलो वाली रात्रि खुले आकाश वाली रात्रि से गर्म होती है,इसकी वजह पार्थिव विकिरण है।
523- आइन्सटीन को प्रकाश वैद्युत प्रभाव सिद्धांत के लिये नोबेल पुरस्कार मिला।
524- लाउडस्पीकर एक ऐसा यंत्र है,जोमाइक्रोफोन से सर्वप्रथम ध्वनि ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में एवं तत्पश्चात विद्युत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
525- मुक्त दोलन करती हुई कोई वस्तु जब किसी समान कला मे दोलन करती हुई वस्तु या व्यवस्था के सम्पर्क में आती है,तो उसका आयाम बहुत बढ़ जाता है,यहपरिघटना अनुनाद कहलाती है।
526- एकाँस्टिक्स सभी प्रकार के अन्य सुसंगत स्रोतों से दो प्रकाश बीम के व्यतिकरण से बने त्रिविमीय बिंब को होलोग्राफी कहते हैं।
527- लेंस के पीछे आंख के भाग में वाइट्रीअसह्युमर भरा रहता है।
528- पूर्ण आंतरिक परावर्तन एक प्रकाशीय घटना है,जिसमे प्रकाश की किरण किसी माध्यम के तल पर ऐसे कोण पर आपतित होती है कि उसका परावर्तन उसी माध्यम में हो जाता है।
529- धुप के चश्मे की शक्ति शुन्य होती है, क्योंकि चश्में की दोंनोसतहो की वक्रता त्रिज्या समान होती है।
530- यदि हम समतल दर्पण की ओर 10cm/s की गति से चलते हैं,तो हमारा प्रतिबिंब 20cm/s की गति से बढ़ता है।
531- सूर्य का प्रकाश जब किसी प्रिज्म से गुजरता है, तब अपवर्तन के कारण प्रिज्म के आधार की ओर झुकने के साथ-साथ विभिन्न रंगो के प्रकाश में बट जाता है,इस प्रकार प्राप्त रंगो के समुह को वर्णक्रम कहते हैं तथा प्रकाश के विभिन्न रंगो में विभक्त होने की प्रक्रिया को प्रकाश का वर्ण विक्षेप कहते है।
532- भारत में घरो में प्रयुक्त प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति 50 हटर्ज होती है।
533- संस्पर्श लेंसों को पालिविनाइलक्लोराइड से बनाया जाता है।
534- प्रकाश की तरंगदैर्ध्य उसके रंगो को निर्धारित करती है।
आवृति के कारण प्रकाश कई रंगो में विभक्त हो जाता है।
535- आइनो के रजतन के लिए सिल्वरनाइट्रेट प्रयुक्त होता है।
536- किसी गैस में उत्पन्न ध्वनि तरंग सदैव अनुदैर्ध्य होती है।
537- लाल कमल का फूल हरे प्रकाश में देखने पर काला दिखाई देगा।
538- प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश की नीली तरंगदैर्ध्य सर्वाधिक प्रभावशाली होती है।
539- एक सरल दूरदर्शी (Simple Telescope) को दो उत्तल लेंसों से बनाया जाता है।
ग 540- ईट में ध्वनि की तीव्रता अधिक होती है, क्योंकि ध्वनि की तीव्रता घनत्व पर निर्भर करती है।
541- युद्धक विमान अधिक ऊंचाइयों पर उड़ते है, क्योंकि रडार- संसुधन से बचाव हैतु आवश्यक होता है।
542- ध्वनि विद्युत चुंबकीय प्रभाव भी उत्पन्न नहीं करती है।
543- एक संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में अभिदृशयक एवं नेत्रिका की आवर्धन क्षमताएं क्रमशः m1एवं m2हैं।
सुक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता m1×m2है।
547- 3900 Aतरंगदैर्ध्य की प्रकाश तरंग की आवृत्ति 1× 1015हर्ट्ज होगी।
548- ‘प्रकाश के कणिका सिद्धांर’ का प्रतिपादन न्यूटन ने किया था।
549- ध्वनि का वेग सबसे ज्यादा इस्पात में होता है।
550- एक तरंग की आवृत्ति 120 हर्ट्ज है।
यदि तरंग की चाल 480 मी./से. हो, तो उसकी तरंगदैर्ध्य 4 मीटर होगी।
(V=na) 551- एक आदमी जो 10 मीटर से अधिक दूरी की वस्तु स्पष्ट नहीं देख पाता है, वह मायोपिया दृष्टि दोष से पीड़ित है।
552- प्रकाश की गति की तुलना में रेडियो तरंग की गति एकसमान होती है।
553- एक आवर्धकलेंस में एक सरल उत्तल लेंस होता है।
554- दो समतल दर्पण एक-दूसरे के 90°के कोण पर झुके हुए है, दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंबों की संख्या 3 होगी।
555- जामुनी (Purple) श्वेत प्रकाश वर्णक्रम का भाग नहीं है।
556- एक्स किरण का उपयोग अंधेरे में फोटोग्राफबिंबों के रूप में किया जाता हैं।
557- बादलों वाली रात्रि खुले आकाश वाली रात्रि से गर्म होती है, इसकी वजह पार्थिव विकिरण है।
558- जब प्रकाश का लेंस में प्रसार होता है, तो अवतल लेंस उसका अभिसरण करता है।
559- पेरिस्कोप की कार्य प्रणाली केवल परावर्तन सिद्धांत पर कार्य करती है।
560- सामान्य वार्तालाप की ऊंची आवाज तकरीबन-60 dB होती है।
561- आपारदर्शी वस्तु का रंग परावर्तन के कारण दिखाई देता है।
562- प्रकाश पथ को प्रकाश का संरचण कहते हैं।
563- समतल दर्पण की नाभीय लंबाई अनन्त होती है।
564- दो वस्तुओं के मध्य ध्वनि की प्रतिध्वनि सुनाई पड़ने हेतु अल्पतम दूरी 17.2मी. होनी चाहिए।
565- किसी नवयुवक को सामान्य दृष्टि के लिए स्पष्ट दृष्टि की अल्पतम दूरी लगभग 25सेमी. है।
566- अल्ट्रासाउंड से संबंधित आवृत्तियों का पराम 20KHZ(20000HZ) से ऊपर होता है।
567- मानव नेत्र की कार्यप्रणाली कैमरा के समरूप है।
568- निकट के दृष्टि का कारण रेटिना की दुर्वलता है।
569- जब दो समतल दर्पण परस्पर 60 डिग्री के कोण पर रखे जाते है, तो पांच प्रतिबिंब बनते हैं।
570- रात्रि में देखने के यंत्र में सुक्ष्म तरंग (Infrared wave)का उपयोग किया जाता है।
571- हमारी आंखों का रंग परितारिका (Iris)में मेलानिन की मात्रा पर आधारित है।
572- नाइक्रोम सामान्यतः विद्युत-तापन उपकरणों में प्रयोग किया जाता है।
573- चुंबकीय चिन्ह के द्वारा रिओस्टेट (धारा नियंत्रक) प्रदर्शित होता है।
574- विभवान्तर की एस. आई. इकाई वोल्ट है।
575- धातु के तार का प्रतिरोध इसकी लंबाई के समानुपाती और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्यत्क्रमानुपाती होता है।
576- वोल्टमीटर को विद्युत परिपथ में समांतर जोड़ा जाता है।
577- t समय में विद्युत धारा I के प्रतिरोध R से प्रवाहित होने पर प्रतिरोध में उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा Hको सूत्र H=I2 Rt द्वारा व्यक्त किया जाता है।
578- विद्युत हीटर विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर आधारित है।
579- किसी आवेशित निकाय द्वारा किसी अन्य आवेशित निकाय पर लगाए गए बल को विद्युतस्थैतिक बल कहते हैं।
580- वायरवाउंडवेरिएबलरिस्टेंस को रिहोस्टेट (Rheostats)के नाम से जाना जाता है।
581- विद्युत आवेश की SI इकाई कूलॉम है।
582- 2500 वाट्स= 2.5 KW होता है।
583- आकार का एक घटक, जिसका प्रतिरोध कम होता है, सुचालक कहलाता है।
584- विद्युत विभवांतर की S.I. इकाई वोल्ट है।
585- यदि विद्युत प्रभार (Q)और समय (t) दिया गया हो, तो विद्युत धारा (i) ज्ञात करने का सूत्र Q/t होगा।
586- तार का प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल के व्युत्क्रम अनुपात में होता है।
भौतिक विज्ञान पालीटेक्निक 2020 587- ओमिक डिवाइस का धारा- वोल्टेज ग्राफ ‘ रेखिय ग्राफ ‘ कहलाता है 588- जब सर्किट में श्रृखला में प्रतिरोधक जुड़े होते है, तब सर्किट के माध्यम से धारा का मान ‘एक ही समान रहता ‘है 589- उच्च तापमान प्राप्त करने के लिए,इलेक्ट्रिक तापन उपकरणों में सामान्यत: एलाँय का प्रयोग किया जाता है 590- इलेक्ट्रिक सर्किट में धारा नियंत्रक का प्रयोग प्राय: प्रतिरोध को परिवर्तित करने के लिये किया जाता है 591- जूल का नियम विधुत धारा के उष्मीय प्रभाव से सम्बन्धित है 592- विधुत चालक की प्रतिरोधकता सामग्री पदार्थ के भौतिक गुणों पर निर्भर करती है 593- प्रतिरोध की SI ईकाई ओम है 594- आवेश की SI ईकाई कुलाम होता है 595- ओम के नियमानुसार , ताप पर एक चालक से गुजरने वाली धारा विभवान्तर के समानुपाती होती है 596- चुम्बक के आस-पास की जगह जहां इसके प्रभाव का पता लगाया जा सकता है चुम्बकीय क्षेत्र कहलाता है 597- ताप प्रभाव,रासायनिक प्रभाव,चुम्बकिय प्रभाव एंव सकुंचन प्रभाव में सें संकुचन प्रभाव में सें केवल संकुचन प्रभाव विधुत धारा उत्पन्न नहीं होता है 598- 10 V के विभवान्तर वाले दो बिन्दुओ के बीच 4C के चार्ज को स्थानांतरित करनें मे 40 J का काम किया जाता है 599- यदि दों बिन्दुओ के मध्य 3 कूलाम का आवेश ले जाने के लिये किए गए कार्य की मात्रा 72 J है तो इन बिन्दुओ के बीच विभवान्तर 24V होगा 600- विधुत धारा मापने के लिए एम्पियर का उपयोग किया जाता है 601- विभवान्तर, कार्य और आवेश में W=v.qका सम्बन्ध होता है 602- एक वोल्ट 1 जूल या 1 कूलाम के बराबर होता है 603- विधुत धारा I=Q/t के बराबर होता है 604- विधुत वाहक बल का मान ε=E/Q के बराबर होता है 605- ओम का नियम गैसीय चालक और जर्मेनियम एंव सिलिकाँन जैसे अर्ध्दचालको पर लागु नही होता है 606- हाइड्रोपाँवर संयंत्र गिरते जल की स्थितिज उर्जा को विधुत उर्जा में बदलने में मदद करता है 607- विधुत हीटर विधुत धारा के तापीय प्रभाव पर आधारित है 608- अनुप्रस्थ भाग का क्षेत्रफल सुचालक के प्रतिरोध को प्रतिकुल रुप से प्रभावित करेगा 609- इलेक्ट्रिक घंटी विधुत के तापीय प्रभाव के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर आधारित नहीं होता है 610- एक कंडक्टर का प्रतिरोध सीधे लम्बाई के अनुपातिक है 611- बैटरी द्वारा बल्ब को प्रकाशित करना, रासायनिक उर्जा का विधुत में रुपान्तरण है 612- विधुत पंखा, विधुत ऊर्जा का यांत्रिक उर्जा में परिवर्तन का उदाहरण है 613- ओम का नियम (ohm’s law) विभवान्तर और विधुत के बीच सम्बन्ध का वर्णन करता है 614- दो या दो से अधिक सेल के संयोजन को बैटरी कहते है 615- विधुत बल्ब में आमतौर पर रासायनिक रुप सें निष्क्रिय गैस भरी होती है जैसे- नाइट्रोजन या कोई निष्क्रिय गैस 616-काइल की गति की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र के सापेक्ष 90 होने पर प्रेरित धारा अधिकतम होती है 617- श्रेणी परिपथ में विधुत प्रवाहित होने का केवल एक मार्ग होता है 618- यदी पूर्व की ओर प्रक्षेपित अल्फा कण को चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा उत्तर की ओर विक्षेपित कर दिया जाता है, तो उस की क्षेत्र की दिशा अधोमुखी होगी 619- विधुत परिपथ में इलेक्ट्रान की गति से विधुत धारा बनती है 620- चाँदी विधुत की बेहतर सुचालक है 621- ऐसे वायर जो घरों में बिजली संचारित करते है, उनमें पाँली विनाइल क्लोराइड (PVC) की कोटींग होती है 622- गैल्वनोमीटर का उपयोग विधुत धारा की दिशा का पता लगाने के लिये किया जाता है 623- चुम्बकीय क्षेत्र का मात्रक ओसर्टेड है तथा शक्ति (POWER) का मात्रक वाट है 624- विभवान्तर और विधुत धारा के बीच सम्बन्ध , जर्मन भौतिक वैज्ञानी जार्ज साइमन ओम द्वारा ज्ञात किया गया था 625- वोल्टमापी द्वारा विभवान्तर मापा जाता है 626- ट्रान्सफार्मर अन्योन्य प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करने वाला एक य़ंत्र है 627- जिन पदार्थो से होकर विधुत धारा प्रवाहीत नही होती है , उन्हें विधुतरोधी कहते है जैसें – लाख, सीसा, नाइट,काष्ठ, रबर, अभ्रक, सल्फर, शुष्क हवा , सिल्क आदी 628- किसी चालक तार का प्रतिरोध तापमान बढ़ने के साथ बढ़ता है 629- पानी विधुत का खराब सुचालक है 630- धातुएं अच्छी चालक होती है, क्यों की उनमें मुक्त इलेक्ट्रान होते है 631- विधुत रुप से परमाणु उदासीन है 632- विधुत जनित्र (Generator) यांत्रिक ऊर्जा को विधुत ऊर्जा परिवर्तित करके विधुत उत्पन्न करतें है 633- विधुत बैट्री का अविष्कार एलेसेंड्रो वोल्टा नें किया था 634- एक विधुत द्विध्रुव को किसी गोले के केन्द्र पर रखने पर गोले की सतह से गुजरने वाली फ्लक्स अनंन्त होगी 635- तड़ित चालक तांबे के बनाये जाते है 636- आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र से होकर अपनी दिशा के लम्ब में चलता है, तब कण की गति अपरिवर्तित रहती है 637-किसी पदार्थ की सापेक्ष विधुतशीलता (Relative permittivity) सदैव एक से बड़ी होती है 638- चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान होने पर न्युट्रान विक्षेपित नही होता है क्योंकी जब वैधुत लघु-पथन होता है, तब उपभोक्ता बिना कोई नुकसान पहुचाए विधुत धारा भूमी में प्रवेश कर जाती है 639- इलक्ट्राँनो को कक्षा में बाधें रखने वाले बल को स्थिर-वैधुत बल कहते है 640- धातुए अच्छी चालक होती है,क्योकिं उनमें मुक्त इलेक्ट्रान होते हैं 641-पृथ्वी एक चुम्बक की तरह व्यवहार करती है, जिसका उत्तरी ध्रुव (N) तथा दक्षिणी ध्रुव (S) होता है 642- विधुत वहन के लिए चालक सबसे अच्छा समझा जाता है 643- विधुत रुप से परमाणु उदासीन है 644- इलेक्ट्रोप्लेटींग धातु को कठोर होने में काम करता है 645- कैपेसिटर विधुत क्षेत्र में विधुत उर्जा संचित रखता है 646- एक ही वाट के बल्ब की तुलना में ट्यूबलाइट की रोशनी शीतल महसुस होती है क्योंकी ट्युबलाइट कम बिजली खपत करता है 647- आगत सौर विकीरण विधुत चुम्बकीय तंरगो के रुप में प्राप्त होता है 648- सामान्यत: फेज तार के साथ स्विच को संयोजित किया जाता है 649- मरकरी बैटरी (Mercury Battery) प्राथमिक बैटरी है 650- एक ऊष्मीय कुण्डली नियत काल से बर्फ को पिघलाती है 651-धनात्मक आवेश वाले कण अचानक पृथ्वी की ओर गति करना प्रारंभ करते है पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र उन्हें पश्चिम की ओर विक्षेपित करेगा 652- पानी में हवाई बुलबुले पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण चमकते हैं ----ऊष्मा विकीरण------- 653- अवरक्त विकीरण गर्म भट्ठी से उत्सर्जित होने वाला विकीरण है यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडीएशन का एक प्रकार है जो वस्तुओ के गर्म होने पर उत्सर्जित होती है 654- सौर ऊर्जा संग्राहको में पैराबोलिक डिश क्लेक्टर में अधिकतम दक्षता प्राप्त होती है 655- प्लास्टिक, एबोनाइट, कागज, कपास, बैकेलाइट, शुष्क हवा तथा रबड़ सर्वाधिक ऊष्मारोधी हैं 656- वाष्पीकरण की दर पानी के स्तर से प्रभावित नही होती है 657- पराबैंगनी विकीरण सूर्य द्वारा उत्सर्जित हानिकारक विकिरण है 658- ऊष्मागतिकी के प्रथम नियमानुसार ऊर्जा को न उत्पन्न और ही न ही नष्ट किया जाता है 659- pb और Hg तुलनात्मक रुप से ऊष्मा के कुचालक होते है 660- स्वतंत्र रुप से लटकती किसी वस्तु का गुरुत्व केन्द्र लटकाव बिन्दु के ठिक नीचे स्थित होता है 661- एक गर्म शुष्क दिन का अर्थ है कि वायुमण्डल का तापमान उच्च है और हवा की आर्द्रता कम है इन दोनों कारको वाष्पीकरण की दर में वृद्धी होती है और इस प्रकार भारी शीतलन का उत्पादन होता है 662- ऊष्माक्षेपी अभिक्रीया वह क्रिया है जिसमें ऊष्मा निकलती है 663- अपने क्वथनांक पर जब एक तरल पदार्थ गैस में परिवर्तित होता है तब उसके अणुओ की औसत गतिज ऊर्जा में वृद्धि होती है।
664- उष्मा उत्तम अवशोषक तथा उत्तम उत्सर्जक भी होता है।
665- ऊष्मा,विकीरण प्रक्रिया से सर्वाधिक तीव्र गति से स्थानान्तरित होती है 666- ऊष्मा का संचरण तीन विधियो द्वारा होता है ,जो है-(1) चालन, (2) संवहन (3) विकीरण 667- सुबह का सूरज इतना गर्म नही होता जितना दोपहर का,क्योकी सुबह के समय सूरज की किरणो को अतंरिक्ष में दुरी तय करनी पड़ती है 668- किसी पिंड का ताप 1 c बढ़ाने के लिये आवश्यक ऊष्मा विशिष्ट ऊष्मा कहलाता है 669- घड़ी की चाभी भरने के बाद उसमें यांत्रिक ऊर्जा भण्डारित हो जाती है 670- हवा का वाष्प घनत्व 14.4 होता है 671- 2000 ग्राम पानी के तापमान को 100C से 50 0C तक बढ़ाने के लिये आवश्यक ऊष्मा 80,000 कैलोरी है 672- धरती से प्राप्त ऊष्मा ऊर्जा को भू-ऊष्मीय ऊर्जा कहते है 673- संवहन (Convetion) से ट्रान्समिशन , सम्प्रेषित करने का कार्य या प्रक्रिया तथा एक क्षेत्र में करंट संचरण द्वारा गैस का द्रव्य में ऊष्मा अंतरण तथा वायुमण्डल में तीव्र गति से ऊष्मा या अन्य वायुमण्डलीय गुणको का अतंरण विशेषकर ऊर्ध्वगामी निर्देशित गति द्वारा होता है 674- सर्दी के मौसम में ठंण्ड लगने पर कंप-कपाने के कारण का प्रतिपादन तापगतिकीय के द्वितीय नियम द्वारा किया जाता है।
675- धातु से बने चाय के बरतनों में लकड़ी के हैण्डल लगे होते है, क्योकिं लकड़ी ,ऊष्मा का रोधक है -------इंजन------ 676- ट्राजिंस्टर दो डायोडों का एक संय़ोजन है 677- निम्नतापकारी इंजन का उपयोग अंतरिक्ष शटल में किया जाता है 678- प्लैनेरिया नामक एक फ्लैटवार्म में बहुत सामान्य आंखे होती है, जो वास्तव में केवल आंखो के धब्बे होते है, जो प्रकाश का पता लगाते हैं।
679- सूर्य में सौर ऊर्जा के उत्पादन के समय नाभिकीय संलयन अभिक्रीया सम्पन्न होती है।
680- वह बल जो परमाणु के भीतर न्युट्राँन द्वारा प्रोटाँन पर आरोपित होता है, नाभिकीय बल कहलाता है।
681- विखंडन के दो प्रकार होते हैं।
682- नाभिकीय ऊर्जा, पंरपरागत जीवाश्म ईधन का एक विकल्प है।
683- सुर्य में सौर ऊर्जा के उत्पादन के समय नाभिकीय संलयन की अभिक्रिया सम्पन्न होती है।
684- अंतरिक्षयान से अंतरिक्षयात्री को आकाश काला दिखाई देता है 685- इसरो (ISRO) द्वारा संचार उपग्रह GSAT-19 के सफल प्रक्षेपण के लिय़े GSLV MK III-DI के सफल प्रक्षेपण यान का उपयोग किया गया।
686- डाँल्टन ने परमाणु की सरंचना का प्रतिपादन किया।
687- हाइड्रोजन बम न्यूक्लियर फ्युजन (नाभिकीय संलयन) के सिद्धान्त पर बनाया जाता है 688- सुर्य की असीमित ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) होता है 689- जब किसी भारी नाभिक के टुटने से दो छोटे नाभिक बनते है, तो विशाल मात्रा में ऊर्जा ऊत्सर्जित होती है इस क्रिया को ‘नाभिकीय विखण्डन , कहते है।
690- परमाणु के नाभिक का आकार 10-15 मीटर कोटि का होता है।
691-चुम्बकीय कम्पास हमेंशा उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर इंगित करता है, स्थान परिवर्तन के साथ इसकी सटीकता बदलती है तथा चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति पता लगाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
692- 1 ग्रा. पानी के तापमान को 1 C0बढ़ाने के लिए 1 कैलोरी ऊष्मा की जरुरत होती है।
693- जब किसी इस्पात के राँड को गर्म किया जाता है,तो यह भारी हो जाएगा।
694- लवण जल (Salt Water) विधुत का बेहतर सुचालक है।
695- एल्युमीनियम की चालकता के कारण इसका उपयोग उच्च वोल्टता संचारण में किया जाता है।
696- सुपर कंडक्टर की चालकता अनन्त होती है।
697- चुम्बक से विकर्षित होने वाली वस्तुओ को डायमैग्नेट कहते है।
698- रडार (RADAR) में रेडियो तरंग, विधुत चुम्बकीय तरंगो का उपयोग होता है।
699- अर्द्धचालक में होल्स भारित आवेश होता है।
700- म्हो (mhos) में विधुत चालकत्व को मापा जाता है।
701- सीमेंस चालकता का मात्रक है।
इसके अतिरिक्त म्हो सेमी.भी विधुत चालकता का मात्रक होता है।
702- जब धातु का तापमान बढ़ता है, तो इसका प्रतिरोध भी बढ़ जाता है।
703- एक अचिन्हित नाल चुम्बक के ध्रुवों को चुम्बकीय कम्पास द्वारा ज्ञात किया जा सकता है।
704- विधुत और चुम्बकत्व का गहरा सम्बन्ध है, इसका पता सर्वप्रथम मैक्सवेल ने लगाया।
705- विधुत लैम्प के फिलामेंन्ट में उच्च प्रतिरोध और उच्च गलनांक होता है।
706- दो तार एक ही वस्तु और लंबाई के है और एक की त्रिज्या दूसरी की दोगुनी है , तो उनके प्रतिरोध का अनुपात 1:4 होगा।
708- बिजली के एक चालक में इलेक्ट्रान बिन्दु A से बिन्दु B की ओर बढ़ते हैं, तो विद्युत धारा की दिशा B से A की ओर होगी।
709- एक चुम्बकीय कम्पास को उत्तरी ध्रुव पर ले जाया जाए, तो यह उत्तर दिशा की ओर इंगित करेगा।
710- ताँबे के छल्ले पर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होगा,यदी छल्ले को एक शक्तिशाली चुम्बक के नजदीक लाया जाए।
711- स्थायी चुम्बक (Permanent Magnet) बनाने के लिये निकेल का उपयोग किया जाता है।
712- विद्युतीय क्षेत्र में AC और DC का तात्पर्य-Alternating current and Direct current है।
713- एनरिको फर्मी नें नियंत्रित नाभिकीय विखंडन अभिक्रिया की अवधारणा सर्वप्रथम प्रस्तुत की।
714- रेडियोधर्मी तत्व से प्रोटान ऊत्सर्जित नही होते हैं।
रेडियोधर्मी तत्वो से उत्सर्जित होने वाले अल्फा कण वास्तव में हीलियम नाभिक है।
715- गामा-किरणों की वेधन क्षमता सर्वाधिक है।
716- सौर ऊर्जा भारी तत्वों के संश्लेषण के दौरान प्रोटाँन के संलयन के कारण होती है।
717- ‘बेरियम मील ‘ आहार नाल,पेट एवं छोटी आंत में अनियमितताओं की जाँच की एक प्रविधि है।
जिसमें X-किरण चित्रण का प्रयोग होता है।
718- खाद्य ऊर्जा को हम कैलोरी ईकाई में माप सकते हैं।
719- सुर्य के प्रकाश का 1/3भाग ‘इन्फ्रारेड रेज” होता है।
720- सौर ऊर्जा का इलेक्ट्राँनिक प्रभाव सिलिकाँन और जर्मेनियम पर अधिक होता है।
इसलिए सोलर सेल सिलिकाँन और जर्मेनियम से बनाये जाते है।
721- हाइड्रोजन बम न्यूक्लियर फ्यूजन ( नाभिकीय संलयन ) के सिद्धांत पर बनाया जाता है।
722- न्युट्राँन बम की मुख्य विशेषता है कि जब इसें किसी शहर पर गिराया जाए,तो इससे सजीव प्राणियों को क्षति पहुचेगा मगर भवनो पर नही।
723- विश्व स्तर पर अधिकांश व्यावसायिक नाभिकीय संयंत्रो का शीतलन सोडीयम द्वारा किया जाता है।
724- भूतापीय ऊर्जा का सर्वाधिक उत्पादन अमेरिका (USA) में होता है।
- पृथ्वी की सतह पर, जहां वायु का घर्षण नगण्य हो , वस्तु एक समान त्वरण से गिरती है।
726- हाइड्रोमीटर , लैक्टोमीटर ,ओडोमीटर तथा पनडुब्बी में सें केवल ओडोमीटर आर्किमिडीज के सिद्धांत पर आधारित नही हैं।
727- किसी पदार्थ पर बाह्य बल कार्य करने के बावजूद भी उसके आकार में परिवर्तन न होने का गुण दृढ़ता कहलाता है।
728- ऊर्ध्वपातन किसी ठोस की,बिना द्रव में बदले सीधे वाष्प में रुपान्तरित होने की प्रक्रिया है।
729-रेडियो तरंगे, एक्स किरणें , सुक्ष्म तरंगे (Microwaves) विद्युत चुम्बकीय तरंगे हैं, जबकि ध्वनि तरंगे यांत्रिक तरंगे हैं।
730- किसी वस्तु के द्रव्यमान व वेग के गुणनफल को संवेग (Momentum) कहते हैं।
संवेग एक सदिश राशि है।
731- द्रव्यमान गुरुत्व के कारण त्वरण के मान को प्रभावित करता है।
732- पृथ्वी की सतह जहाँ पर हवा का घर्षण नगण्य होता है।
वस्तुएं एक समान त्वरण से गिरती है।
733- किसी वस्तु पर गुरुत्वीय त्वरण तथा वस्तु के द्रव्यमान के गुणनफल को भार या वजन कहा जाता है।
734- पृथ्वी का द्रव्यमान 5.97 . 1024 किग्रा है।
735- एक शैल (shell) में विस्फोट के बाद अनेक टुकड़े विभिन्न दिशाओं में गति करते हैं।
इस दशा में सवेंग का सरंक्षण होगा।
736- पृथ्वी के केन्द्र पर गुरुत्वीय त्वरण शून्य होता है।
737- किसी वस्तु द्वारा विराम की अवस्था अथवा गति की अवस्था के विरोध की प्रवृत्ति को जड़त्व कहते है।
738- लंबी कूद के दौरान,एक एथलीट कूदने से पहले दौड़ता है।
ऐसा करना उसका संवेग बढ़ाता है।
739- जहाजों में पानी की गहराई मापने के लिए इकोलोकेशन का प्रयोग किया जाता है।
740- किसी पदार्थ के घनत्व को द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन के रुप में परिभाषित किया जाता है।
741- कोई वस्तु निर्वात में स्वतंत्र रुप से गिरती है।
742- दस रुपये के सिक्के और पाँच रुपये के सिक्के ,रेलगाड़ी और हवाई जहाज, स्कूटर और बस तथा एक ही आकार के पत्थर में सें रेलगाड़ी और हवाई जहाज के मध्य जड़त्व का मान अधिकतम होगा।
743- किसी वस्तु का द्रव्यमान समान रहता है,जबकि स्थान के अनुसार भार बदलता रहता है।
744- किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की राशि को उस वस्तु का द्रव्यमान कहा जाता है।
745- g (गुरुत्वाकर्षण ) की इकाई,त्वरण की इकाई के समान ms-2 (मीटर/सेकंड2) होता है।
746- सौर कुकर की सतह का रंग काला होता है।
747- निर्वात में एक सिक्का ,पंख और ईट को एकसाथ गिरा दिया जाता है।
ऐसी स्थिती में पंख , सिक्का और ईट सभी एक साथ नीचे पहुंच जाएगी।
748- ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत का एक उदाहरण प्राकृतिक गैस है जो लंबे समय से प्रयोग में है ।
ये प्रकृति में सीमित मात्रा उपलब्ध होते हैं।
749- एनीमोमीटर का प्रयोग हवा की शक्ती और वेग को मापने के लिए किया जाता है 750- भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) ने विश्व की तीसरी सबसे बड़ी हाइपरसोनिक पवन सुरंग तिरुवनंतपुरम में बनाई है।
751- धातुओं में चाँदी (Silver) की प्रतिरोधकता सबसे कम होती है।
752- विद्युत और चुम्बकत्व का गहरा संबंध है।
इसका पता सर्वप्रथम मैक्सवेल ने लगाया।
753- विद्युत ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत नही हैं जबकि लकड़ी ,कोयला व सूर्य ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोत है।
754- आँक्सीजन की खोज 1774 ई. जोसेफ प्रीस्टले ने की थी।
755- मानव निर्मित प्रथम उपग्रह स्पुतनिक-I था।
756- जापान पर प्रथम परमाणु बम वर्ष 1945 में गिराया गया।
757- फुटबाल प्रत्यास्थता गुण के कारण जमीन पर गिरकर उछलती है।
758- अल्ट्रामाइक्रोस्कोप हेनरी सिन्डेटोफ तथा रिचर्ड एडोल्फ सिगामाँडी ने विकसित किया ।
759- किसी भू-स्थिर उपग्रह की परिक्रमा अवधि 24 घंटे होती है।
760- ध्वनि प्रदूषण एक गैर-सामग्री प्रदूषण है।
761- ‘जूनो” बृहस्पति ग्रह पर नासा मिशन का एक भाग है।
762- एक फ्रीजर में एल्युमीनियम की ट्रे में बर्फ जल्दी गठित होती है।
763- ब्लैक बाँक्स फ्लाइट रिकार्डर का अविष्कार डेविड बाँरेन ने किया।
764- मौसम विज्ञान में रेडियो सोडियम का उपयोग होता है।
765- थर्मस फ्लास्क के अविष्कारक डेबर है।
766- हीटर के तार नाइक्रोम के बने होते हैं।
767- तार खींचने योग्य सबसे नमनीय धातु सोना है।
768- ‘ब्लैक होल सिद्धांत ’ की खोज एस .चन्द्रशेखर ने की थी।
769- तलचर (ओडिशा ) , अपने थर्मल पाँवर प्लांट के लिए प्रसिद्ध है।
770- धातु के आघातवर्ध्यता (Malleability) गुण के कारण उसकी पतली चादर बनाई जा सकती है।
771- ब्युफोर्ट मापक्रम (Beaufurtscale), हवा की गति को मापने के लिए प्रयुक्त होता है 772- जब सूर्य एवं चन्द्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है , अत: चन्द्रग्रहण होता है।
773- पृथ्वी सुर्य से प्रचुरतम मात्रा में ऊर्जा अवरक्त तथा ताप ऊर्जा के रुप में प्राप्त करती है।
774- एक्रोफोबिया ,ऊचाई से डरना है।
775- एन्ड्रोमिडा एक आकाशगंगा है।
776- आग पकड़ने वाले द्रव्यों को दाह्य कहा जाता है।
777- हवा के दो जत्थों (two air masses) के मिलने से बनती रेखा क्रन्ट कहलाती है।
778-कुकर के हैण्डल को पुन: चालन(रिसाइक्लिंग) नही किया जा सकता है।
779-थर्मोस्टेट -एक यंत्र है, जो पानी वाले स्नान उपकरण या ओवन में स्थिर तापमान बनाए रखता है।
780- क्रोनोमीटर एक समुद्र में जहाज के देशान्तर रेखा का निर्धारण करने वाली घड़ी है।
781- पीएसएलवी (PSLV) भारतीय अंन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का सर्वाधिक सफल उपग्रह प्रक्षेपण यान सिद्ध हुआ है।
782- मरीचिका ऊचाँई के साथ वायुमण्डल के अपवर्तनांक में ह्रास का परिणाम है।
783- स्लाइडिंग की तुलना में रोलिंग घर्षण कम होता है।
784-विद्युत मोटर (AC) के आविष्कारक निकोला टेस्ला थे ।
785- बाईसाइकिलों और कारों इत्यादि में बालँ -बियरिंगो (Ball Bearings ) का प्रयोग करते है।
786- स्फिग्मोमैनोमीटर एक उपकरण है, जिसे रक्त दाब मापने के लिए उपयोग किया जाता है।
787- कलन (Calculus) की खोज न्युटन ने की।
788- प्रकृति विज्ञान , ब्रम्हाण्ड का उदभव और विकास को ब्रम्हाँण्ड विज्ञान (cosmology) कहते है।
789- किसी पदार्थ की तार के रुप में तनने की योग्यता Ductility कहलाती है।
790- विद्युत के द्वारा लगी हुई आग को रोकने हेतु कार्बन डाइआँक्साइड का प्रयोग होता है।
791- जमने पर लोहा के सकुंचन का कारण तांबा की अपेक्षा लोहा उत्तम संकुचन गुणयुक्त होता है।
792- डी.डी.टी. पेपर,प्लास्टिक, एल्युमीनियम में सें पेपर जैव अपघटनीय है।
793- पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षीय खिंचाव न्यूनतम एक्सोस्फियर (Exospere) में होता है।
794- ओटीस नाम लिफ्ट (Elevator) से सम्बन्धित है।
795- गिरते हुए जल से उत्पन्न बिजली को हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी कहा जाता है।
796- CFL,LED, हैलोजन,नियान -ये चारो का सम्बन्ध लैंप से है।
797- पवन ऊर्जा स्रोत पर्यावरण के अनुकूल है इससे प्रदुषण नहीं बढ़ता है।
798- बैरोमीटर में पारे का उपयोग किया जाता है ,क्योकि यह शीशे की नली को नम नही करता है,यह आसानी से वाष्प नहीं बनता है तथा भारी तरल पदार्थ होने के कारण इसे छोटी लंबाई की नली की जरुरत पड़ती है।
799- पेट्रोलियम अग्नि के लिए फोम टाइप के अग्निनिर्वापक का उपयोग किया जाता है।
800- आकाशीय पिंडो का अध्ययन खगोल विज्ञान कहते है।
801- एक ठण्डी साफ्ट ड्रिंक की बोतल ,ढक्कन खोलते समय,एक तराजु पर रखी हो,तो भार कम होगा।
802- ब्रम्हाण्ड का अध्ययन काँस्मोलॉजी (cosmology) रुप में जाना जाता है।
803-कृत्रिम उपग्रह का प्रयोग टी.वी. प्रसारण खनिज खोज ,अंतरिक्ष अनुसंधान आदि सभी के लिए किया जाता है।
804- सामान्य मनुष्य का तापमान लगभग 36.90C होता है।
805- आधुनिक आणविक सिद्धांत का प्रतिपादन जॉन डाल्टन ने किया ।
806- लेसर का तात्पर्य-लाइट एम्पलीफिकेशन बाई स्टीमुलेटन एमिसन आँफ रेडीएशन है।

800physics